मंगलवार, 18 फ़रवरी 2020

पल्स पोलियो | Pulse Polio

नमस्कार दोस्तो मेै अमित वैष्णव आपका स्वागत करता हूँ हमारी इस पोस्ट में, आज कि इस पोस्ट में हम बात करेंगे पल्स पोलियो Pulse Polio के बारे में, और जानेगे कि किस तरह यह भारत में आया और से क्या लाभ हुऐ, आज कि इस पोस्ट में मैं पल्स पोलियो के बारें में  आपको सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करने कि कोशिश करूँगा, अगर कही त्रुति रहे गयी हो तो कमेंट करे, हम उसमें पुन: सुधार करेगे।

तो चलिऐ शुरू करते है... 

🔴पल्स पोलियो :-

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भारत ने डब्‍ल्‍यूएचओ WHO (World Health Organization) वैश्विक पोलियो उन्‍मूलन प्रयास के परिणाम स्‍वरूप 1995 में पल्‍स पोलियो टीकाकरण (पीपीआई) कार्यक्रम आरंभ किया ' इस कार्यक्रम के तहत 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्‍चों को पोलियो समाप्‍त होने तक हर वर्ष दिसंबर और जनवरी माह में ओरल पोलियो टीके (ओपीवी) की दो खुराकें दी जाती हैं।

यह अभियान सफल सिद्ध हुआ है और भारत में पोलियो माइलिटिस की दर में काफी कमी आई है' पीपीआई की शुरुआत ओपीवी के तहत शत प्रतिशत कवरेज प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से की गई थी' इसका लक्ष्‍य उन्‍नत सामाजिक प्रेरण, उन क्षेत्रों में मॉप अप प्रचालनों की योजना बनाकर उन बच्‍चों तक पहुंचना है जहां पोलियो वायरस लगभग गायब हो चुका है और यहां जनता के बीच उच्‍च मनोबल बनाए रखना है' 2009 के दौरान हाल ही में भारत में विश्‍व के पोलियो के मामलों का उच्‍चतम भार (741) था, यहां तीन अन्‍य महामारियों से पीडित देशों की संख्‍या से अधिक मामले थे' यह टीका बच्‍चों तक पहुंचाने के असाधारण उपाय अपनाने से भारत में पश्चिम बंगाल राज्‍य की एक दो वर्षीय बालिका के अलावा कोई अन्‍य मामला नहीं देखा गया जिसे 13जनवरी 2011 को लकवा हो गया था।

 'आज भारत ने पोलियो के खिलाफ अपने संघर्ष में एक महत्‍वपूर्ण पड़ाव प्राप्‍त किया है, चूंकि अब पोलियो का अन्‍य कोई केन्‍द्र नहीं है' भारत में 13 जनवरी 2011 के बाद से सीवेज के नमूनों में न तो वन्‍य पोलियो वायरस और न ही अन्‍य पोलियो वायरस का मामला दर्ज किया गया है 'इसकी असाधारण उपलब्धि लाखों टीका लगाने वालों, स्‍वयं सेवकों, सामाजिक प्रेरणादायी व्‍यक्तियों ,अभिनेताओं , सामाजिक कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं के साथ सरकार द्वारा लगाई गई ऊर्जा ,समर्पण और कठोर प्रयास का परिणाम है ' पोलियो उन्‍मूलन के प्रयास देश में सर्वाधिक मान्‍यता प्राप्‍त ब्रांड हैं, जिसमें फिल्‍म उद्योग के चर्चित सितारे जनता को संदेश देते हैं 'ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन का प्रयास एक वरदान सिद्ध हुआ है ' सरकार को तकनीकी और रसद संबंधी सहायता प्रदान करने के लिए 1997 में राष्‍ट्रीय पोलियो निगरानी परियोजना आरंभ की गई और अब यह राज्‍य सरकारों के साथ नजदीकी से कार्य करती है और देश में पोलियो उन्‍मूलन का लक्ष्‍य पूरा करने के लिए भागीदारी एजेंसियों की एक बड़ी श्रृंखला इसमें संलग्‍न है।

🔴पोलियोमाइलिटीस (Poliomyelitis):-

  • ✳ यह एक संक्रामक रोग है जो एक ऐसे वायरस से उत्‍पन्‍न होता है, जो गले तथा आंत में रहता है। 
  • ✳ पोलियोमाइलिटिस एक ग्रीक शब्‍द पोलियो से आया है जिसका अर्थ है ''भूरा'', माइलियोस का अर्थ है मेरु रज्‍जु और आइटिस का अर्थ है प्रज्‍जवलन।
  • ✳ यह आम तौर पर एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति में संक्रमित व्‍यक्ति के मल के माध्यम से फैलता है। यह नाक और मुंह के स्राव से भी फैलता है।
  • ✳ हालाँकि, यह मुख्यतः एक से पाँच वर्ष की आयु के बच्चों को ही प्रभावित करता है, क्योंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं हुई होती है। 
  • ✳ पोलियो का पहला टीका जोनास सौल्क द्वारा विकसित किया गया था।
  • ✳ गौरतलब है कि दक्षिण-पूर्व एशिया सहित भारत को वर्ष 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था।
  • ✳ पोलियो-मुक्त होने के बावजूद भारतीय नीति-निर्माताओं द्वारा पोलियो पर इतना ध्यान इसलिये दिया जा रहा है क्योंकि पोलियो वायरस के भारत में वापस आने का खतरा है।

🔴 पल्स पोलियो अभियान :-

✳ भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन वैश्विक पोलियो उन्‍मूलन प्रयास के परिणामस्‍वरूप 1995 में पल्‍स पोलियो टीकाकरण (PPI) कार्यक्रम आरंभ किया। इस कार्यक्रम के तहत 5 वर्ष से कम आयु के सभी बच्‍चों को पोलियो समाप्‍त होने तक हर वर्ष दिसम्‍बर और जनवरी माह में ओरल पोलियो टीके (OPV) की दो खुराकें दी जाती हैं।

✳ पल्स पोलियो कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत को पोलियो मुक्त बनाना है।

✳इस कार्यक्रम के तहत ये भी पता किया जाता है कि हाल ही में  किसी को यह बिमारी तो नही हुई है इसके लिऐ वोलेन्टीयर्स लोगो से घर -घर जाकर पुछते है।

✳ यह कार्यक्रम तीन दिनो तक चलता है जिसमें पहले दिन वोलेन्टीयर्स अपने बूथ पर बच्चो को पोलियो पिलाते है एंव अन्य दो दिन घर-घर घूम कर पोलियो पीलाते है ताकि कोई बच्चा शेष ना रहे जाऐ।

✳यह कार्यक्रम हर वर्ष साल में दो बार किया जाता है।


🔴 पल्स पोलियो दिवस :-

विश्व पोलियो दिवस 'विश्व पोलियो दिवस' प्रत्येक वर्ष '24 अक्टूबर' को मनाया जाता है, क्योंकि अक्टूबर माह में ही जोनास सॉक का जन्म हुआ था, जो वर्ष 1955 में पोलियो की पहली वैक्सीन का आविष्कार करने वाली टीम के प्रमुख थे। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य पोलियो जैसी बीमारी के विषय में लोगों में जागरूकता फैलाना है।

तो दोस्तो हमारा आज कि यह पोस्ट यही समापत होती है, नयी जानकारी मिलने पर भविष्य में पोस्ट में विस्तार किया जा सकता है।
यहा आने के लिऐ धन्यवाद...

सोमवार, 31 दिसंबर 2018

प्राथमिक उपचार Frist Aid

नमस्कार दोस्तो, AV HINDI CREATOR कि हमारी यह पोस्ट स्वास्थ्य से सम्बंधित है आज मैं आपको पूरी जानकारी देने वाला हूँ प्राथमिक उपचार (Frist Aid) के बारे में, तो दोस्तो पढते रहीऐ इस पोस्ट को अन्त तक।

प्राथमिक उपचार क्या है What is Frist Aid


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जब किसी दुर्घटना व्यक्ति को डॉक्टर यहां अस्पताल से पहले जो उसकी  जान बचाने के लिए सहायता या सेवा की जाती है उसे प्राथमिक  चिकित्सा या फर्स्ट ऐड कहते हैं.उस व्यक्ति की जान बचाने के लिए हम आस पास की किसी भी वस्तु का उपयोग कर सकते है ,जिससे उसे अस्पताल तक ले जाने तक आराम मिल सके .प्राथमिक चिकित्सा करने वाले व्यक्ति को यह जरुर पता होना चाहिए इमरजेंसी के समय उसे क्या नहीं करना चाहिए .क्योंकि गलत प्राथमिक चिकित्सा से उस दुर्घटना व्यक्ति की जान जाने का खतरा बढ़ सकता है।


दुर्घटना आदि होने के बाद कई बार ऐसा भी होता है कि प्राथमिक उपचार मिलने के बावजूद पीड़ित व्यक्ति की हालत सुधरने की बजाय और बिगड़ जाती है. उसकी ऐसी हालत प्राथमिक उपचार करने वाले व्यक्ति से गलत प्राथमिकता होना .प्राथमिक उपचार करने वाले से अनजाने में हुई जरा सी गलती पीड़ित के लिए घातक हो सकती है. उसकी ऐसी हालत प्राथमिक उपचार के बारे में सही जानकारी न होना होता है .
प्राथमिक चिकित्सा निम्नलिखित इमरजेंसी अवस्ता में दी जा सकती है – किसी चीज से टकरा जाना ,इलेक्ट्रिकल शाक लगना ,दम घुटना(पानी में डूबने के कारण, फांसी लगने के कारण या साँस नल्ली में किसी बाहरी चीज का अटक जाना), ह्रदय गति रूकना-हार्ट अटैक, खून बहना, शारीर में जहर का असर होना, जल जाना, हीट स्ट्रोक(अत्यधिक गर्मी के कारण शारीर में पानी की कमी), बेहोश या कोमा, मोच, हड्डी टूटना और किसी जानवर के काटने पर किसी भी चीज से चोट लगना।

प्राथमिकता के साधारण नियम

  • दुर्घटना या बीमार व्यक्ति के लिए सही प्राथमिक चिकित्सा का प्रयोग करें
  • किसी को भी डाक्टर या एम्बुलेंस को बुलाने के कहें
  • यदि पीड़ित व्यक्ति को दुर्घटना से खतरा हो तो उसे बताएं नहीं
  • पीड़ित व्यक्ति को अकेला न छोड़े
  • पीड़ित व्यक्ति को होसला दे कि वह ठीक हो जाएगा.क्योंकि दुर्घटना व्यक्ति को होसला देना चाहिए।

प्राथमिक चिकित्सा नियम ABC

 A ( Airway ) :- सबसे पहले यह पता लगाए कि पीड़ित व्यक्ति तक वायु पहुँच रही है या नही.इससे यह मालूम किया जाता है घायल व्यक्ति को साँस कही बंद तो न हो गया हो .श्वासनली में रुकाव खासकर बेहोश लोगों में जीभ के कारण हो सकता है. बेहोशी के बाद मुहँ के मांसपेशियों में ढीला पड़ने के कारण जीभ गले के पिछले भाग में गिर जाता है जिससे श्वासनली रुक जाती है।
( Breathing ) :- जो व्यक्ति पीड़ित अवस्था में होते है तो उसे साँस लेने में ज्यादा दिक्कत आती है .सबसे पहले अपने कान को घायल व्यक्ति के मुह के पास ले जा कर सुनें, देखें और महसूस करें कि घायल व्यक्ति तक साँस ले रहा है या नहीं ,अगर वह साँस  ले रहा है तो उसे उसी समय अपने मुहं से साँस दे. घायल व्यक्ति को पीठ के बल सीधे लेटा कर उसके मुहँ को खोल कर अपने मुहँ से हवा भरे।
C ( Circulation ) :-  अब यह देखे कि घायल व्यक्ति की नाडी चल रही है या नहीं ,अगर घायल व्यक्ति  नाडी रुक गई है तो उसके लिए कार्डियोपल्मोनरी रिसास्किटेशन CPR से चालू करें .इसमें एक बार मुहँ से हवा देने बाद मरीज़ के दिल के ऊपर एक हाँथ के ऊपर दूसरा हाँथ रख कर ज़ोर-ज़ोर से चार बार दबाएँ। जब तक घायल व्यक्ति अपने आप सांस नहीं लेता। यह काम दो व्यक्ति होने पर और भी सही प्रकार से होता है क्योंकि इससे एक व्यक्ति मुह करता है तो दूसरा Cardiopulmonary Resuscitation(CPR)  करता है।

प्राथमिक चिकित्सा किट और सामग्री

प्राथमिक  चिकित्सा की जानकारी होने के साथ-साथ हम खुद का भी उपचार कर सकते हैं.प्राथमिक  उपचार की सुविधा के लिए हम प्राथमिक चिकित्सा की पेटिका बनाते जिसमें कुछ वस्तुए  एवं औषधियां होती है जिसमें कुछ बाजार की और कुछ घरेलू औषधियां रखी होती है.इस पेटिका का विवरण नीचे पूरी डिटेल में बताया गया है .
  1. एक बॉक्स हो जिसमें घाव को सांप और कवर करने के लिए अलग-अलग पटियां हो
  2. छोटी कैंची
  3. डेटोल / सेवलॉन/ एंटी बैक्टीरियल की शीशी हो
  4. रुई का बंडल
  5. पट्टी के बंडल
  6. 5 से 6 बैंडेज
  7. छोटी चिमटी
  8. तेज धार वाला चाकू सुइयों का पैकेट
  9. मेडिसिन (आई ) ड्रोपर
  10. मलाशयी थर्मामीटर
  11. गर्म पानी की बोतल
  12. बर्फ का बैग
  13. धुप की जलन ,कीड़े -मोकोड़े के काटने आदि के लिए केलाइमन लोशन की बोतल
  14. चिपकने वाली मेडिकल टेप
  15. सर्दी – खांसी, सिर दर्द, बुखार की दवा
  16. ग्लूकोस
  17. विटामिन की गोलियां
  18. नयी बैटरिया के साथ फ्लेशलाइट

प्राथमिक चिकित्सा के महत्व

प्राथमिक चिकित्सा एक दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को बहुत ही जरूरी होती है सामान्य जीवन में ऐसे हम बहुत सारे काम करते हैं जहां पर हमारे साथ दुर्घटना हो सकती है चाहे हम घर में काम करें या फिर किसी कंपनी फैक्ट्री में काम करें हमें दुर्घटना होने से कोई नहीं बचा सकता लेकिन प्राथमिक चिकित्सा के माध्यम से हम उस दुर्घटना में होने वाले नुकसान से बच सकते हैं तो नीचे आपको अलग-अलग प्रकार की दुर्घटना में अलग-अलग प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा के बारे में बताया गया है।

कपड़ों में आग लग जाने पर


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Fire Burne

  • यदि खाना बनाते समय या किसी भी कारण से व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाती है तो उसे तुरंत कंबल से ढक कर जमीन पर लुडकाना चाहिए और उसके मुंह को नहीं ढकना चाहिए।
  • जलते हुए व्यक्ति पर कभी भी पानी नहीं डालना चाहिए क्योंकि इस से जले हुए स्थान पर   घाव और अधिक गंभीर हो जाता है।
  • जले हुए व्यक्ति को किसी दूसरे स्थान पर ले जाए जहां पर कोई ना हो यानी एकांत जगह हो और और उसे पीने के लिए चाय या दूध दे।
  • जले हुए  स्थान पर खाने के सोडे के गोल से पट्टी करनी चाहिए।
  • यदि जलते हुए  व्यक्ति के कपड़ा चिप जाता है तो उसे उसके शरीर से उस कपड़े को आराम से उतारे और जले हुए स्थान पर जैतुन या नारियल का तेल लगाए।

सिर में चोट लगने की दुर्घटना होना



यदि किसी कारण से सिर में चोट लग जाती है तो उस व्यक्ति के साथ निम्न प्रकार से प्राथमिक चिकित्सा करें।
  • सिर में चोट लगे हुए व्यक्ति को कुर्सी पर सिर ऊपर उठाकर  बिठाए।
  • यदि कान से खून बह रहा तो सिर को एक और मोड़ दे.
  • किसी साफ कपड़े को ठंडे पानी में भिगोकर चोट लगे व्यक्ति के सिर पर रखे।
  • यदि चोट लगने के कारण व्यक्ति बेहोश हो जाता है तो उस व्यक्ति को होश में लाने का प्रयास करें और जल्दी ही डॉक्टर की सहायता ले।

सांप के काटने पर



यदि किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है तो उसके लिए निम्न प्रकार से प्राथमिक चिकित्सा करनी  चाहिए .
  • सांप के काटे हुए व्यक्ति को शांत करने का प्रयास करें उसे आराम करने दें.
  • सांप के काटे हुए स्थान को साबुन से अच्छी प्रकार से धोए
  • सांप के काटे हुए स्थान को उस व्यक्ति के दिल से हमेशा नीचे रखे
  • सांप के काटे हुए स्थान को और उसके आसपास स्थान को बर्फ से पैक कर दे ताकि इस जहर का फैलना कम हो जाए
  • सांप के काटे हुए व्यक्ति को सोने ना दे हमेशा उस पर अपनी नजर रखें
  • और जितना जल्दी हो सके उस व्यक्ति को अस्पताल में ले जाएं

कुत्ते के काटने पर




यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट लेता है तो उस व्यक्ति के लिए निम्न प्रकार से प्राथमिक  चिकित्सा करनी चाहिए. क्योंकि कुत्ते के मुंह में कई प्रकार के बैक्टीरिया या वायरस होते हैं
  • कुत्ते से काटे हुए व्यक्ति के उस स्थान को साबुन और पानी से अच्छी प्रकार से धोए
  • साबुन और पानी से धोते समय ज्यादा ना रगड़े
  • यदि कटे हुए स्थान पर खून बह रहा तो थोड़ा सा खून बहने दे इससे इन्फेक्शन साफ हो जाता है
  • और कुत्ते से कटे हुए व्यक्ति को जितना जल्दी हो सके अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन का टीका लगवाए

बिजली से करेंट लगने पर


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Electric Shock

यदि किसी व्यक्ति को करंट लग जाता है तो उसके लिए निम्न प्रकार  से प्राथमिक चिकित्सा करनी चाहिए .
  • यदि किसी व्यक्ति को करेंट लगा है तो सबसे पहले बिजली के मेन स्विच को बंद करें
  • यदि बिजली सर्विस बंद ना कर सके तो उस व्यक्ति को सुखी लकड़ी या किसी पलास्टिक वस्तु से उस व्यक्ति को दूर करें.
  • यदि करंट लगा हुआ व्यक्ति होश में ना तो उसे ABC रुल से होश में लाए
  • यदि करंट लगे हुए व्यक्ति जल जाता तो जले हुए स्थान को साफ कपड़े से ढके
  • और जितना जल्दी हो सके उस व्यक्ति को अस्पताल ले जाएं।

प्राथमिक चिकित्सा के उदेश्य Aim of First Aid in Hindi

  • घायल व्यक्ति का जान बचाना
  • बिगड़ी हालत से बाहरा निकालना
  • तबियत के सुधार में बढ़ावा देना

प्राथमिक चिकित्सा की उपयोगी बातें




जब कोई व्यक्ति घायल या अचानक बीमार पड़ जाता है, तो चिकित्सकीय मदद से पहले का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यही वह समय होता है जब पीड़ित पर पूरा ध्यान दिया जाना चाहिये। प्राथमिक उपचार के लिए कुछ सलाह यहां दिये जा रहे हैं-
  • यह सुनिश्चित करें कि आपके घर में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था है। इसमें कुछ प्रमुख दवाइयां भी हों जिन तक आसानी से पहुंचा जा सकता हो।
  • अपने प्राथमिक चिकित्सा उपकरणों, दवाइयों और अन्य चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर रखें।
  • किसी पीड़ित की मदद से पहले खुद को सुरक्षित बना लें। दृश्य का अनुमान करें और संभावित खतरों का आकलन कर लें। जहां तक संभव हो, दस्तानों का उपयोग करें ताकि खून तथा शरीर से निकलनेवाले अन्य द्रव्य से आप बच सकें।
  • यदि आपात स्थिति हो तो यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित की जीभ उसकी श्वास नली को अवरुद्ध नहीं करे। मुंह पूरी तरह खाली हो। आपात-स्थिति में मरीज का सांस लेते रहना जरूरी है। यदि सांस बंद हो तो कृत्रिम सांस देने का उपाय करें।
  • यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित की नब्ज चल रही हो और उसका रक्त-संचार जारी रहे। यह आप बहते हुए खून को देख कर पता लगा सकते हैं। यदि मरीज के शरीर से खून तेजी से बह रहा हो या उसने जहर खा ली हो और उसकी सांस या हृदय की धड़कन रुक गयी हो तो तेजी से काम करें। याद रखें कि हर सेकेंड का महत्व है।
  • यह महत्वपूर्ण है कि गर्दन या रीढ़ में चोट लगे मरीज को इधर से उधर खिसकाया न जाये। यदि ऐसा करना जरूरी हो तो धीरे-धीरे करें। यदि मरीज ने उल्टी की हो और उसकी गर्दन टूटी नहीं हो तो उसे दूसरी ओर कर दें। मरीज को कंबल आदि से ढंक कर गर्म रखें।
  • जब आप किसी मरीज की प्राथमिक चिकित्सा कर रहे हों तो किसी दूसरे व्यक्ति को चिकित्सकीय मदद के लिए भेजें। जो व्यक्ति चिकित्सक के पास जाये, उसे आपात स्थिति की पूरी जानकारी हो और वह चिकित्सक से यह सवाल जरूर करे कि एंबुलेंस पहुंचने तक क्या किया जा सकता है।
  • शांत रहें और मरीज को मनोवैज्ञानिक समर्थन दें।
  • किसी बेहोश या अर्द्ध बेहोश मरीज को तरल न पिलायें। तरल पदार्थ उसकी श्वास नली में प्रवेश कर सकता है और उसका दम घुट सकता है। किसी बेहोश व्यक्ति को चपत लगा कर या हिला कर होश में लाने की कोशिश न करें।
  • मरीज के पास कोई आपातकालीन चिकित्सकीय पहचान-पत्र की तलाश करें ताकि यह पता चल सके कि मरीज को किसी दवा से एलर्जी है या नहीं अथवा वह किसी गंभीर बीमारी से तो ग्रस्त नहीं है।

रविवार, 11 नवंबर 2018

स्वास्थ्य देखभाल के नुस्के Healthcare Tips

नमस्कार दोस्तो मै Av Hindi Creator आज आपको कुछ उपयोगी जानकारी दुंगा हमारे स्वास्थ्य से सम्बन्धित और हम जानेगे कि कैसे एक स्वस्थ जीवन जीया जाऐ।


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स्वस्थ रहना हमारे लिए बहुत जरूरी है. वो कहते हैं न स्वस्थ शरीर में ही सुखों का वास होता है. और स्वस्थ शरीर के लिए नियमित व्यायाम, सही आहार और साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखना होता है. लेकिन हम अपनी बिजी लाइफ में यह सब नहीं कर पाते. समय की इतनी कमी है कि हम चाह कर भी योगा, व्यायाम या सही आहार तालिका बना ही नहीं पाते. अगर आप भी हैं इतने ही बिजी तो अब घबराईए मत, हम आपको बता रहे हैं कुछ छोटे-छोटे नुस्खे और टिप्स, जो आपको हेल्दी और स्वस्थ बनाए रखने में करेंगे मदद- 


स्वास्थ्य देखभाल के नुस्के HealthCare Tips

(1). कहीं भी बाहर से घर आने के बाद, किसी बाहरी वस्तु को हाथ लगाने के बाद, खाना बनाने से पहले, खाने से पहले, खाने के बाद और बाथरूम का उपयोग करने के बाद हाथों को अच्छी तरह साबुन से धोएं। यदि आपके घर में कोई छोटा बच्चा है तब तो यह और भी जरूरी हो जाता है। उसे हाथ लगाने से पहले अपने हाथ अच्छे से जरूर धोएं।

(2).घर में सफाई पर खास ध्यान दें, विशेषकर रसोई तथा शौचालयों पर। पानी को कहीं भी इकट्ठा न होने दें। सिंक, वॉश बेसिन आदि जैसी जगहों पर नियमित रूप से सफाई करें तथा फिनाइल, फ्लोर क्लीनर आदि का उपयोग करती रहें। खाने की किसी भी वस्तु को खुला न छोड़ें। कच्चे और पके हुए खाने को अलग-अलग रखें। खाना पकाने तथा खाने के लिए उपयोग में आने वाले बर्तनों, फ्रिज, ओवन आदि को भी साफ रखें। कभी भी गीले बर्तनों को रैक में नहीं रखें, न ही बिना सूखे डिब्बों आदि के ढक्कन लगाकर रखें। 

(3).ताजी सब्जियों-फलों का प्रयोग करें। उपयोग में आने वाले मसाले, अनाजों तथा अन्य सामग्री का भंडारण भी सही तरीके से करें तथा एक्सपायरी डेट वाली वस्तुओं पर तारीख देखने का ध्यान रखें। 

(4).बहुत ज्यादा तेल, मसालों से बने, बैक्ड तथा गरिष्ठ भोजन का उपयोग न करें। खाने को सही तापमान पर पकाएं और ज्यादा पकाकर सब्जियों आदि के पौष्टिक तत्व नष्ट न करें। साथ ही ओवन का प्रयोग करते समय तापमान का खास ध्यान रखें। भोज्य पदार्थों को हमेशा ढंककर रखें और ताजा भोजन खाएं। 

(5).खाने में सलाद, दही, दूध, दलिया, हरी सब्जियों, साबुत दाल-अनाज आदि का प्रयोग अवश्य करें। कोशिश करें कि आपकी प्लेट में 'वैरायटी ऑफ फूड' शामिल हो। खाना पकाने तथा पीने के लिए साफ पानी का उपयोग करें। सब्जियों तथा फलों को अच्छी तरह धोकर प्रयोग में लाएं। 

(6).खाना पकाने के लिए अनसैचुरेटेड वेजिटेबल ऑइल (जैसे सोयाबीन, सनफ्लॉवर, मक्का या ऑलिव ऑइल) के प्रयोग को प्राथमिकता दें। खाने में शकर तथा नमक दोनों की मात्रा का प्रयोग कम से कम करें। जंकफूड, सॉफ्ट ड्रिंक तथा आर्टिफिशियल शकर से बने ज्यूस आदि का उपयोग न करें। कोशिश करें कि रात का खाना आठ बजे तक हो और यह भोजन हल्का-फुल्का हो। 

(7).अपने विश्राम करने या सोने के कमरे को साफ-सुथरा, हवादार और खुला-खुला रखें। चादरें, तकियों के गिलाफ तथा पर्दों को बदलती रहें तथा मैट्रेस या गद्दों को भी समय-समय पर धूप दिखाकर झटकारें। 

(8). मेडिटेशन, योगा या ध्यान का प्रयोग एकाग्रता बढ़ाने तथा तनाव से दूर रहने के लिए करें। 

(9).कोई भी एक व्यायाम रोज जरूर करें। इसके लिए रोजाना कम से कम आधा घंटा दें और व्यायाम के तरीके बदलते रहें, जैसे कभी एयरोबिक्स करें तो कभी सिर्फ तेज चलें। अगर किसी भी चीज के लिए वक्त नहीं निकाल पा रहे तो दफ्तर या घर की सीढ़ियां चढ़ने और तेज चलने का लक्ष्य रखें। कोशिश करें कि दफ्तर में भी आपको बहुत देर तक एक ही पोजीशन में न बैठा रहना पड़े। 

(10).45 की उम्र के बाद अपना रूटीन चेकअप करवाते रहें और यदि डॉक्टर आपको कोई औषधि देता है तो उसे नियमित लें। प्रकृति के करीब रहने का समय जरूर निकालें। बच्चों के साथ खेलें, अपने पालतू जानवर के साथ दौड़ें और परिवार के साथ हल्के-फुल्के मनोरंजन का भी समय निकालें।


अच्छे स्वास्थ्य के घरेलू नुस्के Home made tips for Good Health

  • दिन में दो- चार बार एक चम्मच शहद को पानी में मिलाकर पीना चाहिए. इससे रक्‍तचाप नियंत्रण में रहता है.

  • एक ग्‍लास पानी में एक नींबू निचोड़कर सुबह खाली पेट पीने से आंखों की रोशनी ठीक रहती है.

  • धूप से जली त्वचा पर निखार के लिए नारियल पानी, कच्चा दूध, खीरे और नींबू का रस व चंदन पाउडर मिलाकर नहाने से पहले शरीर पर लगाएं.

  • अपने नाखूनों पर रोजाना जैतून का तेल लगाकर हल्‍की मसाज करें. इससे आपके हाथ साफ और सुंदर दिखेंगे.

  • पका केला मैश कर चेहरे पर लगाएं. आधा घंटे बाद ठंडे पानी से धो लें.

  • चेचक या फुंसियों के दाग हटाने के लिए 2 पिसे बादाम, 2 चम्मच दूध और संतरों के छिलके का 1 चम्मच पेस्‍ट मिलाकर मलें.

  • आप रोजाना होंठों पर चुकंदर का रस लगाएं और आधे घंटे बाद होंठ ठंडे पानी से साफ कर लें.

  • रुखे बालों के लिए कोई मृदु और एक्सट्रा प्रोटीनयुक्त शैम्‍पू इस्तेमाल करना चाहिए.

  • बालों को झड़ने से रोकने और घना बनाने के लिए नीम के तेल का इस्तेमाल करें.

  • नहाते समय बेहतर एंटी बैक्टीरियल साबुन का इस्‍तेमाल करें.

  • गीले बालों में कंघी भूलकर भी न करें और बालों को सुलझाने के लिए मोटे दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें.

  • बाहर जाने से पहले सनस्क्रीन क्रीम जरूर लगाएं. नीम पैक में गुलाब जल मिला कर चेहरे पर लगाएं. सूखने पर धो लें.

शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

विडियो गेम्स कि लत व उपचार [ Video Games Addiction and treatment]

नम्सकार दोस्तो मै Av Hindi Creator आज आपको बताने वाला हुँ ज्यादा विडीयो गेम्स खेलने के नुकसान व विडियो गेम्स कि लत और उसके उपचार तो पढते रहिये इस पोस्ट को अंत तक।

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हाल के कुछ दिनों में एक गेम 'पोकेमॉन गो' ने खूब चर्चा बटोरी। देश-विदेश, हर जगह व हर किसी की ज़ुबान पर यह ऑनलाइन गेम चढ़ा रहा। इसकी वजह से न सिर्फ बच्चे, बल्कि बड़े भी काफी प्रभावित हुए। कई घायल हुए व कई लोगों को अलग तरीकों से नुकसान पहुंचा पर इसका क्रेज़ ज़रा भी कम होता नहीं दिखा। इस गेम के अलावा और भी कई गेम्स व एप्स हैं जिनका जादू समय-समय पर लोगों के सिर पर चढ़कर बोलता रहता है। ऐसे ही कुछ ऑनलाइन एडिक्टिव एप्स व गेम्स पर एक नज़र।

पोकेमॅान गो (Pokémon go) कि ही तरह 'क्लेस आॅफ क्लेन (clash of clan)' व अभी के सबसे लोकप्रिये गेेेम
जो कि हर एक व्यक्ति कि जबान पर है जी हाँ मेै यहा बात कर रहा हूँ "पब जी (PUBG)" के बारे मे, यह कुछ ऐसे गेेम्स है जो कि काफि लोकप्रिय है परंतु एक हद के बाद यह हमारि सेहत पर काफी बुरा प्रभाव डालते हैं।

वीडियो गेम्स के दुष्प्रभाव (side effect of video games)

वैसे तो विडियो गेम्स खेलने से हमारे मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है और कम समय मे जल्दी से सही फेसले लेने की क्षमता बढती है परन्तु अति किसी भी चीज़ की हो, एक सीमा के बाद वह बुरी हो जाती है। तकनीक के विस्तार ने हर काम को जितना आसान बनाया है, उतना ही लोगों को आरामपरस्त भी। उसी तरह गेमिंग की लत व्यक्ति को शारीरिक व मानसिक तौर पर बीमार कर रही है। जानें उसके नुकसान।
एकाग्रता में कमी आना : दिन-रात एक कर किसी गेम के लेवल्स को पार करते रहने से दूसरे कामों से मन भटकना बेहद सामान्य है। स्टूडेंट्स हों, नौकरीपेशा लोग हों या हाउसवाइव्स, जो भी किसी गेम की लत का शिकार होगा, वह किसी दूसरे काम में मन नहीं लगा पाएगा। कोई ज़रूरी काम करते समय भी उसका ध्यान सिर्फ और सिर्फ अपने पसंदीदा गेम की दुनिया में ही लगा रहेगा, जिसका गलत असर उसके अन्य महत्वपूर्ण कामों पर भी पड़ता है।
नींद की समस्या होना : लगातार खेलते रहने के कारण एक समय के बाद लोगों को नींद से जुड़ी कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। कभी नींद देर से आती है तो कभी वे रात को उठ कर खेलने लग जाते हैं। उनके लिए फोन पास में रख कर सोना भी एक मुसीबत है, अगर पानी पीने के लिए भी उनकी आंख खुलेगी तो वे उस गेम में व्यस्त हो जाएंगे, जिसके कारण उनकी नींद कई घंटों के लिए प्रभावित हो सकती है।
समाज से कटना : लगातार टेक्नोलॉजी के संपर्क में रहने से व्यक्ति अपने आसपास के लोगों से दूर होने लगता है। पार्टी या किसी और सामाजिक कार्यक्रम में होने पर भी वह अपने फोन में आंखें गड़ाए ही बैठा रहेगा। इससे उसके वहां होने या न होने का कोई खास मतलब नहीं रहता है। कुछ नहीं तो कई लोग फोटो एडिटिंग एप्स व फिल्टर्स की सहायता से सेल्फी लेते हुए नज़र आते रहते हैं। यह भी एडिक्शन की श्रेणी में आता है।
चिड़चिड़ापन होना : गेमिंग एडिक्शन के कारण ज़्यादातर लोग, खासकर बच्चे बहुत चिड़चिड़े हो जाते हैं। उनके हाथ से ज़रा देर के लिए भी फोन ले लेने पर वे विचलित होने लगते हैं। कई बार खाना-पीना तक छोड़ देते हैं और इन सबके बीच उनकी पढ़ाई तो डिस्टर्ब होती ही है।

वीडियो गेम्स की लत (Addiction of Video Games)
किसी भी चीज़ की लत तब होती है, जब उसका ज़रूरत से अधिक इस्तेमाल होने लगे और जब उसके बिना जि़ंदगी में कुछ अधूरा सा लगने लगे। चाय-कॉफी के एडिक्शन की तरह ही अब लोगों को गेम्स का एडिक्शन भी होने लगा है। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक वे फोन या लैपटॉप की कैद में रहने लगे हैं। कुछ काम करते वक्त ज़रा से ब्रेक में भी कई लोग गेम्स खेलते हुए ही नज़र आ जाते हैं। ऐसे लोग कई बार अपने गेम्स की दुनिया में इतना खो जाते हैं कि बस व ट्रेन में अपना स्टॉप या अन्य महत्वपूर्ण काम भी इन्हें याद नहीं रहते हैं। अगर इस स्थिति को समय पर नियंत्रित न किया जाए तो यह बेहद तनावपूर्ण हो सकती है।
केस 1 : किसी भी चीज़ की लत यूं ही नहीं हो जाती है, बल्कि हम खुद ही उसे बढ़ावा देते हैं। दिल्ली के 19 व 22 वर्षीय दो सगे भाइयों को ऑनलाइन गेम खेलने की इतनी अधिक लत हो गई थी कि वे बाथरूम जाने तक के लिए समय नहीं निकाल पाते थे और किसी के टोकने पर खीझ उठते थे। महीने भर एक अस्पताल के साइकिएट्री विभाग में एडमिट रहने के बाद उनकी हालत में सुधार हो सका। इस संदर्भ में मनोवैज्ञानिक सलाहकार विचित्रा दर्गन आनंद कहती हैं, 'ऐसी स्थितियां समाज के लिए बेहद नुकसानदायक हैं। शारीरिक व्यायाम की आदत न होने के कारण ही लोग इन डिजिटल गेम्स की तरफ आकर्षित होते जा रहे हैं। वे दिन भर घरों में घुसे रह कर सिर्फ विडियो गेम्स खेलते रहते हैं, जिसके कारण पढ़ाई से भी उनका मन भटकता है।'
केस 2 : मुंबई की एक मल्टीनेशनल फर्म में मैनेजर के पद पर कार्यरत एक व्यक्ति को अपनी नौकरी सिर्फ इस वजह सेगंवानी पड़ी कि वह दिन भर अपने टैबलेट में पज़ल गेम्स खेलने में व्यस्त रहता था, जिसका नकारात्मक प्रभाव उसके काम पर भी पडऩे लगा था। इन दो वाकयों के अलावा और भी ऐसे कई केस हैं, जिनसे गेमिंग एडिक्शन को साफ तौर पर समझा जा सकता है। कभी छात्र क्लास के दौरान गेम खेलते पकड़े जाते हैं तो कभी ऑफिस से थका हुआ आया व्यक्ति गेम्स के कारण घर पर भी फोन में ही व्यस्त रहता है। ऐसे लोग सोते-जागते या कुछ भी करते वक्त खुद को गेमिंग वल्र्ड का हिस्सा मानते हैं।
केस 3 : चाइना में एक व्यक्ति अपने फ्रेंड के साथ पब जी मोबाइल खेल रहा था और उस वक्त उसने अपने फ्रेंड से 6x स्कोप मांगा और उसके फ्रेंड ने उसे वह देने से मना कर दिया और बस इतनी सी बात को लेकर उस व्यक्ति ने अपने फ्रेंड का कत्ल कर दिया जी हां दोस्तों यह सुनने में तो काफी अजीब है परंतु सच है।

वीडियो गेम्स की लत के उपचार व बचाव (Treatment of Video games Addiction)
इस तरह के एडिक्शन से बचना बहुत ज़रूरी होता है, वर्ना उसका असर आपकी निजी जि़ंदगी पर भी पड़ सकता है। लगातार काम या रिश्तों को अनदेखा करना किसी भी तरह से हितकर नहीं है।
  • लोगों से जितना अधिक हो सके, मेलजोल बढ़ाएं। इसके लिए विभिन्न अवसरों पर पार्टी आदि का आयोजन करते रहें। अपने परिवार व दोस्तों के लिए समय निकालें।
  • अपने कार्यों के लिए समय-सीमा निर्धारित कर उसका गंभीरता से पालन करें।
  • एकाग्रता बढ़ाने के लिए ज़रूरी व दिमागी कार्यों के बीच कुछ समय का ब्रेक लेते रहें। हो सके तो इन ब्रेक्स में फोन व लैपटॉप का कम से कम इस्तेमाल करें।
  • बच्चों को मोबाइल, लैपटॉप व इंटरनेट का ज़्यादा इस्तेमाल न करने दें और उन पर नज़र भी रखे रहें।
  • अगर तमाम कोशिशों के बावज़ूद इन डिजिटल गेम्स से दूरी न बन पा रही हो तो किसी मनोवैज्ञानिक सलाहकार की मदद लेने में हिचकिचाएं नहीं।

इनसे दूरी है जरूरी

हर गेम एडिक्टिव हो, यह ज़रूरी नहीं होता है। कुछ सर्वे से यह बात सामने आई है कि पज़ल, क्विज़, फोटो एडिटिंग एप्स, डेटिंग एप्स, चैटिंग एप्स, शॉपिंग एप्स व मल्टीप्लेयर गेम्स बेहद एडिक्टिव होते हैं।

शनिवार, 27 अक्टूबर 2018

हार्ट अटेक के लक्षण, कारण व घरेलू नुस्के

नमस्कार दोस्तो मै Av Hindi Creator आज आपको बताने जा रहा हु हार्ट अटेक के लक्षण व इसके प्राथमिक उपचार जिससे हम किसी अनहोनी को टाल सके।



हार्ट अटेक (HEART ATTACK):-
बदलते लाइफस्टाइल के साथ आज के इस समय में हर कोई किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है। गलत खान-पान के कारण लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, जिसके कारण बड़ों से लेकर युवाओं में भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ रहा है। कुछ लोग तो हार्ट अटैक के लक्षणों और बचने के उपाय पता नहीं होते। अगर इसके लक्षण और हार्ट अटैक के खतरे से बचने के उपाय पता हो तो इसका खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अलावा हेल्दी डाइट और व्यायाम के जरिए भी आप दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के खतरे से बच सकते है। आज हम आपको हार्ट अटैक के लक्षण, कारण और इससे बचने के कुछ घरेलू उपचार बचाएंगे, जिससे इस खतरे को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है।

हार्ट अटैक कभी भी अचानक अाा सकता हैै, लेकिन कुछ लक्षण हैं, जो हार्ट अटैक के 1 महीने पहले नजर आने लगते हैं।  अगर आपको भी नजर आते हैं यह 6 लक्षण तो सावधान हो जाएं, क्योंकि आप हार्ट अटैक के शि‍कार हो सकते हैं। अभी जानिए इन लक्षणों को, ताकि हार्ट अटैक से बचा जा सके- 

1 सीने में असहजता ( Chest problem) - 
यह दिल के दौरे के लिए जिम्मेदार लक्षणों में से एक है। सीने में होने वाली किसी भी प्रकार की असहजता आपको दिल के दौरे का शि‍कार बना सकती है। खास तौर से सीने में दबाव या जलन महसूस होना। इसके अलावा भी अगर आपको सीने में कुछ परिवर्तन या असहजता का अनुभव हो, तो तुरंत अपने चिकित्सक से सलाह लें।

2 थकान (Fatigue) -
 बगैर किसी मेहनत या काम के थकान होना भी हार्ट अटैक की दस्तक हो सकती है। जब हृदय धमनियां कोलेस्ट्रॉल के कारण बंद या संकुचित हो जाती हैं, तब दिल को अधि‍क मेहनत करने की आवश्यकता होती है, जिससे जल्द ही थकान महसूस होने लगती है। ऐसी स्थि‍ति में कई बार रात में अच्छी खासी नींद लेने के बाद भी आप आलस और थकान का अनुभव करते हैं, और आपको दिन में भी नींद या आराम की जरुरत महसूस होती है।

3 सूजन (Inflammation) - 
जब दिल को शरीर के सभी आंतरिक अंगों में रक्त पहुंचाने के लिए अधि‍क मेहनत करनी पड़ती है, तो शि‍राएं फूल जाती हैं और उनमें सूजन आने की संभावना बढ़ जाती है। इसका असर खास तौर से पैर के पंजे, टखने और अन्य हिस्से में सूजन के रूप में नजर आने लगता है। इसके कभी-कभी होंठों की सतह पर नीला होना भी इसमें शामिल है।

4 सर्दी का बना रहना -
 लंबे समय तक सर्दी या इससे संबंधि‍त लक्षणों का बना रहना भी दिल के दौरे की ओर इशारा करता है। जब दिल, शरीर के आंतरिक अंगों में रक्तसंचार के लिए ज्यादा मेहनत करता है, तब रक्त के फेफड़ों में स्त्रावित होने की संभावना बढ़ जाती है। सर्दी में कफ के साथ सफेद या गुलाबी रंग का बलगम, फेफड़ों में स्त्रावित होने वाले रक्त के कारण हो सकता है।

5 चक्कर आना - 
 जब आपका दिल कमजोर हो जाता है, तो उसके द्वारा होने वाला रक्त का संचार भी सीमित हो जाता है। ऐसे में दिमाग तक आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे निरंतर चक्कर आना या सिर हल्का होना जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यह हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार एक गंभीर लक्षण है, जिस पर आपको तुरंत ध्यान देना चाहिए।

6 सांस लेने मे तकलीफ (dyspnea) -
इनके अलावा सांस लेने में अगर आपको किसी प्रकार का परिवर्तन या कमी का एहसास होता है, तो यह भी दिल के दौरे का लक्षण हो सकता है। जब दिल अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाता तो फेफड़ों तक उतनी मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती जितनी आवश्यकता होती है। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा ही कुछ होता है, तो बगैर देर किए डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

डायबिटीज के मरीजों में कभी-कभी यह लक्षण दिखाई नहीं देते। इस तरह के मरीजों में बिना किसी लक्षण या दर्द के ही Silent Heart Attack पड़ता है

हार्ट अटैक के कारण:
मोटापा
शुगर
हाई कोलेस्ट्रॉल
हाई ब्लड प्रैशर
जेनेटिक प्रॉब्लम

हार्ट अटैक से बचने के घरेलू नुस्खे :-

1. लौकी का जूस
लौकी की सब्जी या जूस का रोजाना सेवन आपको हार्ट अटैक के खतरे से बचाता है। इसके अलावा इसे कच्चा खाना भी दिल की बीमारियों के लिए फायदेमंद होता है।

2. पीपल के पत्तें
पीपल के 10-12 पत्तों को साफ करके पानी में उबाल लें। कम से कम 15 दिनों तक इसे पीने से हार्ट ब्लॉकेज की समस्या खत्म हो जाती है और हार्ट अटैक का खरता कम होता है।

3. अंकुरित गेहूं
गेहूं को 10 मिनट तक पानी में उबालकर अंकुरित करने के लिए किसी कपडे में बांध कर 1 इंच लंबा होने दें। रोजाना इसका सेवन हार्ट अटैक का खतरा कम करता है।

4. गाजर
कच्ची गाजर या इसके जूस का सेवन दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। रोजाना गाजर का रस पीने और डाइट में हरी सब्जियां शामिल करने से आप इससे बच सकते है।

5. अर्जुन की छाल
अर्जुल की छाल को सूखा कर इसका चूर्ण बना लें। रोज इस पाउडर की  इसकी चाय बनाकर पीने से आप हार्ट अटैक के खतरे से दूर रहते है।

6. अदरक का रस
1 कप अदरक का रस, नींबू के रस, लहसुन और एप्पल साइडर सिरका को गर्म करें। ठंडा होने पर इसमें शहद मिक्स कर लें। रोज खाली पेट इसके 3 चम्मच पीने से हार्ट ब्लॉकेज की समस्या खत्म हो जाती है।

तो दोस्तो आप इन नुस्को का उपयोग करके हार्ट अटेक के खतरे को बहोत हद तक कम कर सकते है और अगर आपको उपर दिये गये लक्षण दिखाई दे तो एक बार चिकत्सक को अवश्य दिखाये।
धन्यवाद।।

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2018

उल्टी व जी घबराने के कारण और घरेलू नुस्खे

नमस्कार दोस्तो मै AV HINDI CREATOR आज आपको बताने जा रहा हूं उल्टी और जी घबराने के कारण और उसके घरेलू उपाय तो बने रहिए हमारे साथ और पड़िए इस पोस्ट को शुरू से अंत तक।



उल्टी जी घबराना कारण और घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe For Vomit Nausea


उल्टी Vomit , जी मिचलाना Nausea सभी के साथ होता है। जब पेट में से न चाहते हुए भी धक्के से पेट की सामग्री बाहर निकलती है तो इसे उल्टी होना Vomit कहते है। वमन  Vaman होना या कै होना इसी के नाम है।
उल्टी होने पर पेट की सामग्री मुंह से और नाक से बाहर निकल सकती है। उलटी होने से पहले यह महसूस होना कि उल्टी होने वाली है जी घबराना Ji Ghabrana  , मन घबराना man ghabrana , जी मिचलाना  Ji Michlana  या उल्टी का सा मन होना कहलाता है।
इंग्लिश में इसे नॉज़िया Nausea कहते है। इसे मितली , उबकाई , मचली आदी नामों से भी जाना जाता है। मन घबराने के बाद जरुरी नहीं कि उल्टी हो ही जाये। यह ठीक भी हो सकता है। जी घबराना और उल्टी होना किसी को भी हो सकता है।
बचपन में यह अधिक होता है क्योकि बचपन में स्वाद के कारण खाने पर काबू नहीं होता। कुछ भी कितनी भी मात्रा में खा लेना सामान्य सी बात होती है। कभी कभी बहुत ज्यादा खाने में आ जाता है। पेट फूल सा जाता है और जी घबराने लगता है।
ये महसूस होने लगता है कि अब उल्टी होने वाली है और फिर उल्टी हो जाती है। पेट जरुरत से ज्यादा भरे हुए सामान को बाहर निकाल देता है। इसे रोक नहीं पाते और उल्टी हो जाने पर आराम मिलता है।

उल्टी , जी मिचलाने के कारण – Cause of Vomit and Nausea

उल्टी या जी मिचलाना  सिर्फ अधिक मात्रा में खाने से ही नहीं होता। इसके और भी बहुत से कारण हो सकते है। अपने आप में यह कोई बीमारी नहीं है। लेकिन यह किसी शारीरिक समस्या का संकेत अवश्य हो सकता है। सामान्यता कुछ परिस्थिति जिसमे जी मिचलाने या उलटी होना अधिक होता है , इस प्रकार है :

सफर – safar me ulti

अक्सर बस , कार आदि में लंबे सफर के समय कई लोगों को जी मिचलाने या उलटी होने की परेशानी होती है। पहाड़ी रास्तों पर यह परेशानी ज्यादा हो सकती है । यह मोशन सिकनेस की वहज से हो सकता है ।

एसिडिटी – Acidity se ulti

पेट में एसिड अधिक मात्रा में बनने या किसी और कारण से एसिडिटी होने पर जी घबराता है। उलटी भी हो सकती है।खाली पेट होने पर परेशानी अधिक होती है। एसिडिटी मिटने पर जी घबराना भी ठीक हो जाता है।

गर्भावस्था – pregnancy me ulti

गर्भवास्था में शुरू के कुछ महीनो में जी घबराना और उलटी होना सामान्य से बात है। यह हार्मोन परिवर्तन के कारण होता है। बहुत सी महिलाओं को गर्भ धारण करने के महीने-डेढ़ महीने बाद जी मिचलाना और उलटी होना शुरू हो जाता है। यह तीसरे महीने तक अधिक होता है फिर धीरे धीरे  कम हो जाता है।

पित्ताशय में पथरी – Pet ki kharabi se ulti

पित्ताशय में पथरी होने के कारण पाचन तंत्र पर असर पड़ता है। इसके कारण जी घबराना या उलटी होने की परेशानी हो सकती है।
पाचन तंत्र से सम्बंधित दूसरी परेशानी जैसे आंतो की खराबी , पेट में अल्सर , अपेन्डिक्स , अग्नाशय आदि भी जी मिचलाने या उलटी होने के कारण बन सकते है।

चिंता , तनाव , डर – chinta fikar se ulti

टेंशन , डर , दुःख आदि के समय शरीर में होने वाले परिवर्तन के कारण जी मिचलाने या उलटी होने की परेशानी हो सकती है। इसमें ज्यादा फ़िक्र करने की बात नहीं होती। तनाव दूर करने के प्रयास करने चाहिए। तनाव कम होने पर यह अपने आप ठीक हो जाता है।

फ़ूड पोइज़निंग – food poisoning se ulti

बेक्टिरिया आदि से दूषित खाना खा लेने से पाचन तंत्र पर बुरा असर होता है। शरीर द्वारा इस प्रकार के संक्रमण को बाहर निकालने की प्रक्रिया में उल्टी होने लगते है। दवा लेने से कुछ समय बाद यह ठीक हो जाता है।

सिर की समस्या – sir me chot se ulti

सिर से सम्बंधित परेशानियां जैसे सिर में लगी चोट , ब्रेन स्ट्रोक , ब्रेन ट्यूमर आदि के कारण उलटी हो सकती है। इस अवस्था में तुरंत चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

रक्त में खराबी – khoon me kharabi se ulti

रक्त में पोटेशियम बढ़ने से आदि कारणों से जी घबराने या उलटी होने की समस्या हो सकती है। यह रक्त की जाँच करवाने से पता चलता है।

तेज दर्द – tej dard se ulti

शरीर में किसी भी जगह तेज दर्द उल्टी का कारण बन सकता है। हार्ट अटैक होने पर उलटी हो सकती है।

यूरिन इन्फेक्शन – Urin Infection

पेशाब के नली में संक्रमण होने से जी घबराने और उलटी होने की परेशानी हो सकती है।

अन्य कारण

इसके अतिरिक्त अन्य कारण जैसे  वायरल इन्फेक्शन , तेज बदबू , अधिक शराब पीने , किसी दवा के साइड इफ़ेक्ट की वजह से जी घबराने और उलटी होने की परेशानी हो सकती है।

उल्टी होने के नुकसान – Side Effects of Vomit

—  वैसे उल्टी होने से कुछ खास नुकसान नहीं होता लेकिन कभी कभी इससे किसी गंभीर बीमारी का संकेत मिलता है। इसलिए उलटी का कारण जानकर उसका उपचार अवश्य होना चाहिए ।
—  ज्यादा उल्टी से होने से शरीर में पानी की कमी  (dehydration ) हो सकती है , इसका खतरा बच्चों में अधिक होता है। यदि उल्टी होने के साथ बच्चे में होंठ सूखे हुए , आंखें धंसी हुई , सांसें या धड़कन असामान्य नजर आये तो तुरंत सम्भालना चाहिए।
—  गर्भवस्था में बहुत ज्यादा उल्टी होने से पानी की कमी हो सकती है जो माता और शिशु दोनों के लिए  नुकसान देह हो सकती है।

उल्टी होना कब गंभीर होता है – When Is Vomit  Serious

वैसे तो सामान्य रूप से जी घबराना या उल्टी होना गंभीर नहीं होता और ना ही किसी विशेष उपचार की आवश्यता होती है। लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसे गंभीर मानकर योग्य चिकित्सक से उपचार लेना जरूरी होता है। कुछ ऐसी स्थिति इस प्रकार है :
—  यदि जी घबराना समस्या ज्यादा दिनों तक हो।
—  गर्भावस्था की संभावना हो।
—  यदि घर की दवा से फायदा नहीं हो।
—  पानी की कमी ( Dehydration ) हो जाये।
—  सिर में चोट लगने के कारण उल्टी हो रही हो।
—  एक दिन से ज्यादा लगातार उल्टी हो रही हो।
—  छोटे बच्चे को बुखार के साथ उल्टी दस्त हो रही हो।
—  शिशु में 6 घंटे से पेशाब नहीं किया हो और  पानी की कमी के ( Dehydration ) लक्षण भी दिखाई  दें।
—  उल्टी के साथ खून आये।
—  उल्टी के साथ बहुत तेज सिरदर्द हो।
—  उल्टी हो और गर्दन अकड़ जाये।
—  उल्टी के साथ बेहोशी सी आने लगे।
—  तेज पेट दर्द हो।
—  साँस या धड़कन असामान्य हो जाये।
इन स्थितियों में समस्या की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

उल्टी होने या जी घबराने पर क्या करें – What to do

सामान्य स्थितियों में जी मिचलाने या और उल्टी होने पर ये ध्यान रखें
—  जी घबरा रहा हो तो उल्टी होने से रोकने के लिए लेट जाएँ आराम करें , इससे जी घबराना कम होता है।
—  उल्टी हो जाये तो साफ पानी में थोड़ा नमक मिलाकर अच्छे से कुल्ला कर लें। आराम करें।
—  बार बार उल्टी हो तो पानी की शरीर में कमी ना हो इसका इसका ध्यान रखें , लगातार  थोड़ी थोड़ी मात्रा मात्रा में पानी पीते रहें।
—  डिहाइड्रेशन से बचने के लिए ORS का घोल लेते रहें।
—  खाना खाने के बाद जी घबराता है तो एक बार में ज्यादा खाने से बचें। इसके बजाय कम भोजन ज्यादा बार लेना फायदेमंद होता है। शांति के साथ धीरे धीरे खाएं। गरिष्ठ भोजन से बचें सुपाच्य भोजन ही लें।
—  जब तक उलटी होना ठीक नहीं हो जाये तब तक ठोस आहार न लें तो ज्यादा अच्छा।
—  गर्म भोजन की गंध से जी घबराता हो तो खाना थोड़ा ठंडा हो जाये तब ही लें।
—  जी मिचलाए तो खाना खाने के बाद कुछ देर आराम करें।
—  भोजन के साथ पानी ना लें।
—  जी घबराना बंद हो तभी कुछ खाएं।
—  हल्का खाना जैसे दलिया खिचड़ी लें।
—  तले हुए , तेज  मिर्च मसाले वाली चीजें ना खाएं।
—  खाने खाने के तुरंत बाद शारीरिक मेहनत वाला काम ना करें।


उल्टी रोकने के घरेलु नुस्खे – Gharelu Nuskhe For Vomit

—   अदरक पाचक को मुंह में रखकर चूसने से जी मिचलाना बंद होता है। 
एक चम्मच चावल के धोवन में आधा ग्राम जायफल घिसकर चाटने से उल्टी होना बंद होता है। इसे दो तीन बार लें।
—  दो तीन नींबू के बीज को छीलकर ताजा गुलाब जल या पानी के साथ पीस कर लेने से उल्टी होना तुरंत बंद हो जाता है।
—  नारियल की जटा जलाकर रख कर लें। एक ग्राम यह राख चाट कर आधा कप पानी पी लें। इससे उल्टी बंद होती है। यह दवा हैजा में भी काम करती है।
—  जी मिचलाने पर कटे हुए नींबू में काला नमक और काली मिर्च भरकर चूसें। इससे जी मिचलाना ठीक होता है और उल्टी नहीं होती है।
—  आधा कप पानी में एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ग्लूकोज़ मिलाकर एक-एक घंटे से लेने से उल्टी में आराम आता है।
—  पिसी हुई छोटी इलायची कटे हुए नींबू में भरकर चूसने से उल्टी बंद होती है।
—  सफर के समय उलटी हो तो नींबू या अदरक चूसते रहने से उल्टी नहीं होती।
—  लौंग को मुंह में रखकर चूसने से जी घबराना ठीक होता है।
—  चार लौंग कूटकर एक कप पानी में डालकर उबालें। आधा रह जाये तब छानकर मिश्री मिलाकर पी लें और करवट लेकर लेट जाएँ । दिन में तीन-चार बार इस प्रकार लेने से उलटी बंद होती है।
—  दो लौंग भूनकर पीस लें इसे आधा चम्मच शहद में मिलाकर लेने से उलटी होना मिटता है।
—  हरा धनिया पीसकर इसका लगभग पाँच चम्मच रस निकालकर दिन में चार पांच बार इसे पीने से गर्मी के कारण होने वाली उलटी बंद होती है। इससे गर्भवस्था की उल्टी भी मिटती है।
— एक गिलास पानी में तीन चम्मच धनिया पाउडर और एक चम्मच मिश्री डालकर एक घंटे भीगने के  लिए रखें। एक घंटे बाद छानकर इसमें से चार-चार चम्मच एक-एक घंटे से पियें। इससे उलटी होना बंद होता है। बच्चों को एक-एक चम्मच देने से लाभ होता है। गर्मी  के कारण चक्कर आना , जी घबराना , दिल धड़कना आदि भी इससे बंद होते है।
—  एक चम्मच सेंधा नमक और चार चम्मच जीरा एक कटोरी में लेकर इसमे इतना नींबू का रस मिलाएं कि ये डूब जाएँ। इसे रोजाना हिलाते हुए सूखने दे। सूखने पर चौथाई चम्मच यह जीरा दिन में तीन चार बार खाने से गर्भवस्था में होने वाली उलटी ठीक होती है।
— आम के दो पत्ते और पुदीना बीस पत्ते एक कप पानी के साथ पीस कर छान ले। इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर पियें। इससे उल्टी होना बंद होता है।