रविवार, 3 फ़रवरी 2019

वैलेंटाइन डे क्या है ? What is Valentine Day?

नमस्कार दोस्तो मै Av Hindi Creator आज आपके लिऐ लाया हूँ बेहद रोचक पोस्ट जो कि खास कर प्रेमि व प्रेमिकाओ के लिऐ बेहद रोचक होगी, आज हम बात करने वाले है वैलेंटाइन डे Valentine Day के बारे मे और साथ ही जानेगे इस कि कुछ नयी बाते, तो चलिऐ शुरू करते है।


1.वैलेंटाइन डे कि कहानी | Story of Valentine Day
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Valentine Day

Valentine’s Day Story In Hindi 
valentine किसी day का नाम नहीं है, यह नाम है एक Priest (पादरी ) का जो कि Roam में रहता था, उस वक्त Roam पर Claudius का शासन था जिसकी इच्छा थी कि वह एक शक्तिशाली emperor बने जिसके लिए उसे एक बहुत बड़ी army बनानी थी लेकिन उसने देखा कि Roam के वो लोग जिनकी family है जिनके wives and children है वो army join नहीं करना चाहते तब उस Emperor ने एक rule बनाया जिसके अनुसार उसने future में होने वाली marriages पर ban लगवा दिया यह बात किसी को ठीक नहीं लगी पर उस Emperor के सामने कोई कुछ नहीं कह पाया, यह बात Valentine को भी ठीक नहीं लगी. एक दिन एक couple आया जिसने marriage करने की इच्छा ज़ाहिर की, तब Valentine ने उनकी marriage चुपचाप एक room में करवाई, लेकिन उस Emperor को पता चल गया और उसने Valentine को कैद कर लिया और उसे मौत की सजा सुनाई गई. जब Valentine जेल में बंद था तब सभी लोग उससे मिलने आते थे उसे roses और gifts देते थे, वह सभी बताना चाहते थे कि वह सभी love में believe करते है पर उस emperor ने मौत की सजा दे दी और वह दिन था 14 February 269 A.D. . मरने से पहले Valentine ने एक letter लिखा जो कि प्यार करने वालो के नाम था Valentine ख़ुशी ख़ुशी कुर्बान हुआ है और प्यार को जिन्दा रखने की गुहार करता है इसलिए उस दिन से आज तक 14Feb Valentine की याद में Valentine’s Day के नाम से celebrate किया जाता है।

2.वैलेंटाइन डे कि सुची | List of Valentine Day

दोस्तो मै यहा वैलेंटाइन डे कि सुची दे रहा हूँ और साथ ही मे यह भी कि इसे कैसे मनाते है:-

th February:


Rose Day, Valentine Day, Love, Av Hindi Creator
Rose Day
इसे रोज डे कहते है और इस दिन लोग जिसे वह दिल से प्यार करते है उसे लाल रंग का गुलाब का फूल देते है, अकसर प्रेमि या प्रेमिका लाल रंग के फूल का उपयोग अपने प्यार का इजहार करने के लिऐ करते है, बहोत लोग अपने माता-पिता, भाई-बहन या दोस्तो को भी नीले, पीले, हरे आदी रंगो के फूल भेट करते है।

8 th February:
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propose Day
इसे प्रोपोस डे कहते है जिसमे जो भी जिसे दिल से love करता है उसे propose करता है जिसके अंदाज अलग अलग होते है जिसे वो खुद plan करते है .

9th February:
Chocolate Day, Valentine Day, Love, Av Hindi Creator
Chocolate Day
इसे चॉकलेट डे कहते है,इस दिन सभी अपने love को chocolate देते है इस तरह सभी मिठास बांटते है .

10th February:
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Teddy Day
इसे टेडी बेयर डे कहते है इस दिन lovers एक दुसरे को gifts देते है जिसमे वो सभी अपने best one के लिए उनके favorite gifts लाते है .

11th February :
Promise Day, Promise, Valentine Day, Love, Av Hindi Creator
Promise Day
इसे प्रॉमिस डे कहते है इस दिन सभी अपने love को साथ निभाने का वादा करते है सारी कसमे वादे याद कर उसे पूरा करने का promise करते है.

12th February :
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Kiss Day
इसे किस डे कहते है इस दिन सभी एक दुसरे के साथ वक्त गुजारते है हर लम्हे को याद गार बनाते है पिछली बाते याद कर हर तरह से एक दुसरे के हो जाते है .

13th February:
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Hug Day
इसे हग डे कहते है इस दिन couples एक साथ रह कर अपनी feelings share करते है एक दुसरे को warmly hug देकर सदा एक दुसरे का साथ देने का अहसास जताते है जो कि उन्हें हर कठिन वक्त में भी बांधे रखेगा .

14th February:
Valentine Day, Final Day, Love, Love Day, Happy, Av Hindi Creator
Final Day/Valentine Day
यह final day है जिसे वैलेंटाइन डे कहते है, इस दिन सभी lovers एक दुसरे के साथ पूरा दिन बिताते है celebrate करते है ।

3.वेैलेंटाइन डे कि शायरी
दोस्तो मै यहा वैलेंटाइन डे के लिऐ आपके लिऐ कुछ नयी शायरी लेकर आया हूँ जिसे कि आप अपने प्रेमि या प्रेमिका को सुनाकर या लिखकर दे सकते है और अपने वैलेंटाइन डे को और खास बना सकते है। 
                   दिल ने जिसे ज़िन्दगी भर चाहा है,
आज करूँगा में उनसे इकरार,
जिसकी सदियों से तम्मना की है,
उनसे करूँगा मेरे प्यार का इजहार।
Happy Valentine Day
*****
हम तेरे साथ चलेंगे तू चले ना चले,
तेरा हर दर्द सहेंगे तू कहे या ना कहे,
हम चाहते है की तुम सदा खुश रहो,
हम चाहे रहे या ना रहे।
Happy Valentine Day
*****
आपको पा कर अब खोना नहीं चाहते,
इतना खुश हो कर अब रोना नहीं चाहते,
यह आलम है हमारा आपकी जुदाई का,
आँखों में नींद है मगर सोना नहीं चाहते।
Happy Valentine Day

*****
लफ़्ज़ों में क्या तारीफ़ करूँ आपकी,
आप लफ़्ज़ों में कैसे समा पाओगे,
जब लोग हमारे प्यार के बारे में पूछेंगे,
मेरी आँखों में जानेमन सिर्फ तुम नज़र आओगे।
Happy Valentine Day

*****
तेरी पहली मुलाकात जिन्दगी में एक बहार लाई थी,
हर आईने में तेरी तस्वीर मुझे नजर आई थी,
लोग कहते हैं प्यार में नींद उड़ जाती है,
हमने तो नींदों में ही प्यार की दुनिया बनाई थी।
Happy Valentine Day
*****
कितना अजीब अपनी ज़िन्दगी का सफर निकला,
सारे जहाँ का दर्द अपना मुक़द्दर निकला,
जिसके नाम अपनी ज़िन्दगी का हर लम्हा कर दिया,
अफ़सोस वही हमारी चाहत से बेखबर निकला।
Happy Valentine Day
****
हमे जरूरत नहीं किसी अलफ़ाज़ की,
प्यार तो चीज़ है बस एहसास की,
पास होते आप तो मंज़र कुछ और ही होता,
लेकिन दूर से खबर है हमे आपकी हर धड़कन की।
Happy Valentine Day
*****
ना जाने क्यों जब ये हवाएं मुझे छू कर गुज़रती है,
दिल पे एक दस्तक सी दे जाती है,
शायद इशारो में कहती है तुम आने वाले हो,
या फिर युही मुझे बहला कर चली जाती है।
Happy Valentine Day
*****
कहते है प्यार और ज़हर में कोई फरक नहीं होता है,
ज़हर पीने के बाद लोग मर जाते है और
प्यार करने के बाद लोग जी नहीं पाते हैं।
Happy Valentine Day
*****
आप खुद नहीं जानती आप कितनी प्यारी हो,
जान हो हमारी पर जान से प्यारी हो,
दूरियों के होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता,
आप कल भी हमारी थी और आज भी हमारी हो।
Happy Valentine Day
*****
अजीब सी खुशी है आप में,
की हम आप के ख्यालों में खोए रहते हैं,
ये सोच कर के आप खवाबो में आओगे,
हम दिन में भी सोये रहते हैं।
Happy Valentine Day
*****

मंगलवार, 13 नवंबर 2018

Children's Day बाल दिवस

नमस्कार दोस्तो मैं Av Hindi Creator आज आपको बताने जा रहा हूँ Children's day बाल दिवस के बारे मे कुछ रोचक बाते साथ ही हम जानेगे इसके पीछे का इतिहास।

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Children's day बालदिवस ( bal divs )


History of Children's day बाल दिवस ( bal divs ) का इतिहास

पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) का जन्‍म 14 नवंबर (November 14) को हुआ था. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू के जन्मदिन को देश भर में बाल दिवस (Children's Day) के रूप में मनाया जाता है. उन्‍हें बच्चों से बहुत प्यार था. यही वजह है कि बच्‍चे आज भी उन्‍हें चाचा नेहरू कहकर बुलाते हैं. नेहरू कहते थे कि बच्चे देश का भविष्य है इसलिए ये जरूरी है कि उन्हें प्यार दिया जाए और उनकी देखभाल की जाए जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें. बाल दिवस (Bal Diwas) के दिन स्कूलों में तरह-तरह के रंगारंग कार्यक्रमों, मेलों और ढेर सारी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. इस दिन स्‍कूलों में बच्‍चों के बीच मिठाई और टॉफियां बांटी जाती हैं. कई जगह बच्‍चों को गिफ्ट भी दिए जाते हैं.

बाल दिवस साल 1925 से मनाया जाने लगा था, लेकिन यूएन ने 20 नवंबर 1954 को बाल दिवस मनाने की घोषणा की थी. विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर बाल दिवस मनाया जाता है. भारत में बाल दिवस 1964 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद से मनाया जाने लगा. सर्वसहमति से ये फैसला लिया गया कि नेहरू के जन्मदिन पर बाल दिवस मनाया जाएगा.

भारत में बाल दिवस मनाने की शुरुआत Children's day in india
भारत में हर साल 14 नवंबर को बड़े ही उत्साह के साथ बाल दिवस मनाया जाता है. बच्चों के प्रति जवाहर लाल नेहरू के प्यार और लगाव को देखते हुए उनके जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है. 27 मई 1964 को पंडित जवाहर लाल नेहरु के निधन के बाद बच्चों के प्रति उनके प्यार को देखते हुए सर्वसम्मति से यह फैसला हुआ कि अब से हर साल 14 नवंबर को चाचा नेहरू के जन्मदिवस पर बाल दिवस मनाया जाएगा और बाल दिवस कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा.

कैसे मनाया जाता है बाल दिवस ( bal divs )
- बाल दिवस के दिन बच्चों को गिफ्ट्स दिए जाते हैं.
- इस दिन स्कूलों में रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजित किया जाता है, साथ ही बच्चे विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं.
- बाल दिवस के दिन कई स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती है और बच्चों के लिए खेल कूद का आयोजन होता है.
- कई स्कूलों में बाल दिवस के दिन बच्चों को पिकनिक पर ले जाया जाता है.


Children's day facts बाल दिवस ( bal divs ) से जुडी रोचक बाते
•1. स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्हें बच्चों से बेहद लगाव और प्रेम था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए प्रतिवर्ष उनके जन्मदिन को 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
•2. नेहरूजी के बारे में सोचते ही उनकी 'नेहरू जैकेट' पहने हुए और उसमें गुलाब का फूल लगा हुआ दृश्य मन में उभरकर आने लगता है। दरअसल नेहरूजी को गुलाब का फूल बेहद पसंद था। 
•3. नेहरूजी बच्चों को देश का सुनहरा भविष्य मानते थे।
•4. नेहरूजी युवाओं का विकास चाहते थे इसलिए उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) और आईआईएम (IIM) जैसी संस्थाओं की स्थापना की।

•5. बाल दिवस कई स्कूलों, ऑफिसों व अन्य संस्थाओं में विभिन्न आयोजनों के साथ मनाया जाता है जिसमें बच्चे हिस्सा लेते हैं। कई स्कूलों में तो इस दिन बच्चों को पिकनिक पर ले जाया जाता है और उन्हें इस दिन प्रेरक फिल्में भी दिखाई जाती हैं।
6. भारत के अलावा बाल दिवस दुनियाभर में अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है। सबसे पहले जिस देश में बाल दिवस मनाया गया, वह भारत नहीं बल्कि तुर्की था जिसने 1920 में पहली बार 'बाल दिवस' मनाया।
7. बाल दिवस की नींव 1925 में रखी गई थी जिसके बाद 1953 में दुनियाभर में इसे मान्यता मिली।
8. यूएन (UN) ने 20 नवंबर को बाल दिवस मनाने की घोषणा की लेकिन यह विभिन्न देशों में अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाने लगा। कुछ देशों में आज भी 20 नवंबर को ही बाल दिवस मनाया जाता है।
9. यह दिन बच्चों के बेहतर भविष्य और उनकी मूल जरूरतों को पूरा करने की याद दिलाता है।

Child labour बालश्रम

दोस्तो वैसे तो हम लोग कहते है कि हम विकसित है परन्तु वास्तविकता तो यह है कि अभी हम बस कहने मे ही विकसित है क्योकि भारत और दूसरे देशो मे अभी भी बालश्रम होता है पढने लिखने कि उम्र मे बच्चो से काम करवाया जाता है और उनका शोषण किया जाता है।
वैसे तो भारत के साथ साथ दुसरे देशो कि सरकारो ने भी बालश्रम के लिऐ कानून बनाये है परन्तु फिर भी हमे बहोत से स्थानो पर बालश्रम देखने को मिल जाता है।

रविवार, 11 नवंबर 2018

टीपू सुल्तान कौन थे | Who is Tipu Sultan

नमस्कार दोस्तो मै Av Hindi Creator आज आपको बताने वाला हूँ टीपू सुल्तान का पुरा इतिहास तो बने रहीये हमारे साथ।

Tipu Sultan – ‘म्हैसुर का शेर’ इस नाम से टिपू सुल्तान को जाना जाता है। भारतीय इतिहास में ऐसे कई दिग्गज हुए हैं जिनके बारे में पढ़ना, उनके बारे में लिखना और उन्हें गहराई से जानने की इच्छा व्यक्त होती है। इन्हीं दिग्गजों में से एक थे मैसूर के मशहूर शासक टीपू सुल्तान। जहां एक ओर प्रतापी राजाओं महाराणा प्रताप, बाजीराव पेशवा, पृथ्वीराज चौहान जैसे हिन्दू राजाओं की बात होती है, वहीं दूसरी ओर मैसूर में जन्मे टीपू सुल्तान को भी लोग याद रखते हैं।

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Tipu Sultan History


पूरा नाम  – सुल्तान फतेह अली खान शाहाब
जन्म       – 20 नव्हंबर 1750
जन्मस्थान – युसुफाबाद (कर्नाटक)
पिता       –  हैदर अली
माता       – फतीमा फकरुन्निसा
शिक्षा      – फार्सी, कानडी, उर्दू, अरबी इस भाषा पर प्रभुत्त्व। उन्होंने खुद के गणित और शास्त्र के आधार पर पंचाग तयार किया था।
विवाह     – सिंध सुल्तान के साथ।





(1). उनका नाम


टीपू का जन्म के समय से नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब रखा गया था, लेकिन द्निया दुनिया उन्हें इस नाम से बिल्कुल भी नहीं पहचानती। यदि उनकी पहचान किसी नाम से है तो वह है ‘टीपू सुल्तान’, तो फिर यह नाम कैसे पड़ा?


(2). कैसे पड़ा नाम टीपू सुल्तान?


उनको यह नाम स्वयं उनके माता-पिता द्वारा ही हासिल हुआ था। वे एक प्रसिद्ध धर्म-गुरु टीपू मस्तान ऑलिया को काफी मानते थे, जिसके बाद अपने स्वयं के पुत्र को वह टीपू कहकर ही पुकारते थे। यही कारण है कि सुल्तान फतेह अली खान शाहाब आगे चलकर ‘टीपू सुल्तान’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।


(3). शेर का किया सामना


कहते हैं एक बार टीपू सुल्तान अपने एक फ्रांसिसी दोस्त के साथ जंगल में शिकार करने गए थे। तभी एक शेर ने उन लोगों पर धावा बोल दिया। शेर सुल्तान पर यूं कूदा जिसके कारण उनके शस्त्र उनके हाथों से निकलर कुछ दूर जा गिरे। किसी तरह से उन्होंने जुगत लगाकर तेज़ी से अपनी कटार उठाई और शेर पर वार किया।


(4). नीतियों में तेज़


उनकी इसी समझदारी के कारण 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने मलाबार साम्राज्य को हड़परकर उसपर नियंत्रण पा लिया था। तब उनके पास मलाबार की बड़ी सेना के सामने महज़ 2000 सैनिक थे, लेकिन फिर भी वे डरे नहीं और अंतत: जीत उनकी ही हुई।


(5). कठोर शासक


एक ओर जहां सुल्तान की बहादुरी एवं कुशल दिमाग की तारीफ की जाती है, वहीं दूसरी ओर उनके कठोर शासन के भी उदाहरण दिए जाते हैं। मैसूर के इस शेर ने अपने राज्य में वह हर मुमकिन कार्य कराया जो राज्य की उन्नति के लिए अच्छा था, लेकिन अन्य राज्यों को भी जबर्दस्ती अपना बना लेना सुल्तान का शौक था।


(6). धार्मिक स्थल नष्ट किए


सुल्तान ने ना केवल लोगों को मुसलमान बनाया, बल्कि कई हिन्दू एवं ईसाई धार्मिक स्थलों को नष्ट भी कर दिया। अपने राज्य के साथ-साथ उन सभी राज्यों में, जिन पर सुल्तान की मोहर लग चुकी थी, हर एक राज्य से हिन्दू मंदिरों को हटा दिया।


(7). ब्राह्मणों की मौत


इसके अलावा सुल्तान द्वारा कई ब्राह्मणों को भी मौत के घाट उतारा गया। जानकारों का मानना है कि आज तक के सभी इस्लामिक शासकों में से शायद ही कोई ऐसा था जो टीपू सुल्तान जैसा खूंखार था। उसमें किसी के लिए भी कोई दया भावना नहीं थी।


(8). सुल्तान की कढ़वी सच्चाई


सुल्तान की इस कड़वी सच्चाई के सामने उनके कुछ अच्छे कार्य भी याद किए जाते हैं। शायद आप यकीन ना कर पाएं लेकिन फ्रांस में बनाई गई सबसे पहली मिसाइल के अविष्कार में यदि किसी का सबसे अधिक दिमाग था तो वह थे स्वयं टीपू सुल्तान और उनके पिता हैदर अली


(9). शस्त्र हुए चोरी


सुल्तान अपनी तेज़-तर्रार तलवारों के लिए भी जाने जाते थे, यही कारण है कि उनकी मृत्यु के बाद विदेशी उनके शस्त्रों को चुराकर ले गए थे। सुल्तान के कई सारे शस्त्र वर्ष 2004 तक ब्रिटेन के एक म्यूजियम में ही रखे हुए थे, जिसके बाद एक भारतीय व्यापारी विजय माल्या ने इन्हें खरीद लिया।

टिपू सुल्तान का इतिहास – Tipu Sultan History In Hindi

15 साल के उम्र से टिपू सुल्तान ने अपने पिता हैदर अली के साथ जंग मे हिस्सा लेने की शुरवात की। वो बहोत अभिमानी और आक्रामक स्वभाव का था। वो गुरिल्ला युद्ध से जंग लढ़ने मे माहिर था। रात कभी भी छापा डालना, समझौता – शांति पालन न करना, समय आनेपर पीछे हटकर छापा डालना ऐसे प्रकार भी वो करते थे।
साम्राज्य विस्तार और राज्य मजबूत बनाने के लिये वो सभी तरह के प्रयास किये। फ्रेंच के संबध आने पर सैनिको का आधुनिकीकरण किया।
ख्रिश्चनीकरण के खिलाफ धर्म बदल के मोहीम चलायी। आसपडोस के देशों से व्यापार संबध अच्छे करने के लिये प्रयास किये। टिपू सुल्तान 17 साल सरकार चलाया। उन्होंने खुद की काल गिनती शुरु की। माप-वजन-सिक्के इसमे बदल किये। टिपू सुल्तान को ग्रंथ संग्रह करने का शौक था। ‘फर्मान – बनाम – अलीराज्य’ और ‘फतह – उल – मुजहिददीन’ इन दो ग्रंथो की रचना उन्होंने की।
सैनिक और पराक्रमी टिपू सुल्तान को मात गिराने के लिये लार्ड कॉर्नवॉलीसन ने उनके खिलाफ अग्रेंज – मराठा – निजाम ऐसा संघ स्थापन किया।
1799 के आसपास वेलस्लिने टिपू सुल्तान के खिलाफ जंग शुरु की। उसमे उनकी मौत हुयी। लेकीन प्रजाहितदक्ष शासक, उच्च न्यायाधीश विदेशी दोस्ती अधिकारी और सर सेनापती ऐसे रोल करने वाले टिपू सुल्तान ने म्हैसुर का नाम दुनिया के नक्षे पर लाया। कर्नाटक के श्रीरंगपट्टना मे टिपू सुल्तान का अग्रेंजो ने धोके से कत्ल किया। फिर भी टिपू सुल्तान अग्रेंजो से आखरी सास तक लढते रहे।
विशेषता – Tiger Of Mysore
मृत्यु – 4 मई 1799

शुक्रवार, 26 अक्टूबर 2018

प्रथम विश्व युद्ध

नमस्कार दोस्तों मैं Av Hindi Creator आज आपको मेरी इस पोस्ट द्वारा प्रथम विश्व युद्ध की जानकारी उपलब्ध करवाने वाला हूं तो पढ़ते रहिए इस पोस्ट को अंत तक अब चलिए शुरू करते हैं:-


सन 1914 से 1918 ईस्वी तक लड़ा गया| प्रथम विश्व युद्ध विश्व इतिहास के महत्वपूर्ण घटना है विश्व युद्ध का प्रभाव संपूर्ण विश्व पर पड़ा, इस युद्ध से विश्व में कई क्रांतिकारी परिवर्तन हुए| प्रथम विश्व युद्ध के कुछ कारण बताए गए है:-

1. गुप्त संधियाँ एवं दो गुटों का निर्माण:-

प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व जर्मनी के बिस्मार्क ने कूटनीतिक संधियों द्वारा फ्रांस को अकेला कर दिया, फ्रांस ने रूस में इंग्लैंड के साथ संधि करके जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली के त्रिकूट के विरुद्ध अपना त्रिगुट संग बना लिया| विश्व दो गुटों में बैठ गया|प्रथम विश्व युद्ध इन दोनों गुटों की शक्ति का प्रदर्शन था|

2. शस्त्रीकरण व सैन्यवाद:-

19वीं शताब्दी ईस्वी के उत्तरार्ध में यूरोप के अधिकांश देशों ने अपने शस्त्र बढ़ाने एवं सैन्यवाद को प्रोत्साहन दिया| सैनिक शक्ति के बल पर जर्मनी ने ऑस्ट्रिया को पराजित किया, अब फ्रांस, रूस में इंग्लैंड ने भी अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाना आरंभ कर दिया ऐसी स्थिति में युद्ध होना ही था|

3. साम्राज्यवाद का प्रभाव:-

औद्योगिक क्रांति के बाद यूरोपीय देशों में समृद्धिवादी बनने की महत्वाकांक्षा बढ़ने लगी, कच्चा माल प्राप्त करने व पक्का माल बेचने के लिए अपने उपनिवेश स्थापित करने लगे, जिसने साम्राज्यवाद को प्रोत्साहन दिया| इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली आदि देशों ने कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, भारत, अफ्रीका और एशिया के देशों पर अधिकार कर के अपने साम्राज्य का विस्तार किया| साम्राज्यवादी प्रतिस्पर्धा ने भी यूरोपीय देशों में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न की|

4. समाचार पत्रों का प्रभाव:-

इस समय यूरोप में समाचार पत्रों में भी युद्ध को प्रोत्साहन देने वाले समाचारों की अधिकता रही, इन समाचार पत्रों में एक दूसरे देश पर दोषारोपण को बढ़ावा दिया जाने लगा और भड़काने वाले लेख प्रकाशित किए जाने लगे| एक समाचार पत्र की पंक्तियां थी:- "रूस तैयार है फ्रांस को भी तैयार रहना चाहिए"

5. उग्र राष्ट्रीयता की भावना:-

राष्ट्रवाद की भावना के बल पर उग्र राष्ट्रीयता की भावना बढ़ने लगी, प्रत्येक राष्ट्र अपने राष्ट्र के विकास विस्तार सम्मान व गौरव के लिए अन्य देशों को नष्ट करने के लिए तैयार थे| फ्रांस, अल्सास व लोरेन प्रदेश चाहता था जब की राष्ट्रीयता की भावना के आधार पर पोल, चेक, सर्ब तथा बल्गर लोग ऑस्ट्रिया से अलग होना चाहते थे|

6. कैसर विलियम की महत्वाकांक्षा:-

जर्मन सम्राट कैसर विलियम जर्मनी को विश्व शक्ति बनाना चाहता था तुर्की से समझौता करके उसने बर्लिन बगदाद रेलवे लाइन का निर्माण कराया, नौसेना में विकास को लेकर उसने इंग्लैंड को नाराज कर दिया उसने विचार प्रकट किया कि समुद्री विस्तार जर्मनी की महानता के लिए अनिवार्य नियति है|

7. अंतरराष्ट्रीय संस्था का अभाव:-

उस समय ऐसी कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था नहीं थी जो यूरोपीय देशों के आपसी विवादों को सुलझा कर उन्हें युद्ध से विमुख कर दें, प्रथम विश्व युद्ध के बाद ऐसी संस्थाओं का विकास हुआ|

8. अंतरराष्ट्रीय संकट एवं बाल्कन युद्ध का प्रभाव:-

बीसवीं शताब्दी के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से विश्व के राष्ट्र एक दूसरे के विरोधी हो गए और दो सशस्त्र गुटों में बट गए, 1904 से 1905 ईसवी का रूस, जापान, युद्ध मोरक्को व अगादिर संकट ऑस्ट्रिया द्वारा बोस्निया व हर्जगोवीना पर अधिकार व बाल्कन युद्ध इसी प्रकार के प्रमुख संकट थे|

9. तात्कालिक कारण:-

बोस्निया व हर्जगोवीना को लेकर सेर्बिया मे ऑस्ट्रिया विरोधी भावना थी ऐसे में आस्ट्रिया का राजकुमार फर्डीनेड व उसकी पत्नी की बोस्निया की राजधानी सराजेवो मे सर्ब युवकों ने 28 जून 1914 को सरेआम हत्या कर दी, इसी बात को लेकर 28 जुलाई 1914 को ऑस्ट्रिया ने सर्बिया पर आक्रमण कर दिया| रूस ने सर्बिया के समर्थन में युद्ध प्रारंभ कर दिया, जर्मनी ने भी रूस के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी इसी के साथ प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हो गई|



युद्ध की प्रकृति:-

इस युद्ध में एक तरफ मित्र राष्ट्र थे एवं दूसरी तरफ धुरी राष्ट्र|मित्र राष्ट्रों में इंग्लैंड, फ्रांस, रूस, जापान, अमेरिका, इटली, सेर्बिया, पुर्तगाल, रोमानिया, चीन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा व दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, धुरी राष्ट्रों में जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हंगरी, टर्की तथा बुल्गारिया आदि शामिल थे| युद्ध के प्रारंभिक वर्षों में धुरी राष्ट्र हावी रहे इसी बीच रूस युद्ध से अलग हो गया और 1918 ईस्वी में जर्मनी के साथ ब्रेस्ट लिटोवस्क की संधि कर ली, मित्र राष्ट्रों की विजय के साथ 11 नवंबर 1918 को प्रातः 11:00 बजे युद्ध समाप्त हुआ| युद्ध के बाद पेरिस शांति सम्मेलन हुआ और विभिन्न देशों के साथ अलग अलग संधिया की गई, जर्मनी के साथ वर्साय की संधि की गई|



युद्ध के परिणाम:-

— युद्ध में अपार जन व धन की हानि हुई युद्ध में करोड़ों सैनिकों ने भाग लिया जिसमें 1 करोड़ 30 लाख सैनिक मारे गए और 2 करोड़ 20 लाख सैनिक घायल हुए युद्ध में लगभग एक खरब 86 अरब डॉलर खर्च हुए और लगभग एक खरब की संपत्ति नष्ट हुई

— जर्मनी रूस ऑस्ट्रेलिया में निरंकुश राजतंत्र की समाप्ति हुई

— युद्ध के बाद शांति संधियों के माध्यम से अनेक परिवर्तन हुए चेकोस्लोवाकिया, युगोस्लाविया, लिथुआनिया, लेटेविया, एस्टोनिया, फिनलैंड, पोलैंड आदि नए राज्यों का उदय हुआ

— विभिन्न विचारधाराओं पर आधारित सरकारों की स्थापना हुई रूस में साम्यवादी सरकार जर्मनी में नाजीवाद इटली में फासीवाद सरकारों की स्थापना हुई

— अमेरिका ने युद्ध काल में बड़ी मात्रा में मित्र राष्ट्रों को उधार देकर आर्थिक सहयोग किया था पेरिस शांति सम्मेलन में भी अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी इसी युद्ध से अमेरिका के प्रभाव में वृद्धि हुई

— युद्ध के समय घरेलू मोर्चे वे चिकित्सा क्षेत्र में स्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी अंतः स्त्रियों की स्थिति में सुधार आया था

— द्वितीय विश्व युद्ध का बीजारोपण भी इसी युद्ध के परिणाम स्वरुप हो गया था वर्साय की संधि से असंतुष्ट होकर जर्मनी वे इटली ने विश्व को दूसरे विश्व युद्ध की ओर धकेल दिया

— अमेरिकी राष्ट्रपति विल्सन के प्रयासों से विभिन्न देशों मे विवादों को सुलझाने के लिए राष्ट्र संघ की स्थापना की गई यद्यपि विवादों को सुलझाने में यह संस्था सफल नहीं हुई

हमारी आज की पोस्ट यही समाप्त होती है, अगर आप के मन मे इस पोस्ट को लेकर कोई सवाल है तो नीचे कमेंट बोक्स मे कमेंट करे|



सोमवार, 12 मार्च 2018

नासा का सूरज पर जाने का मिशन 2018

हैल्लो दोस्तो आपका स्वागत है, मै Av Hindi  Creator आज आपको नासा के सन मिशन के बारे में बताने वाला हूं और इसके साथ ही यह भी बताने वाला हूं कि कैसे आप अपना नाम सूरज पर भेज सकते हो, तो पढ़ते रहिए इस ब्लॉग को अंत तक, अब ज्यादा समय नष्ट न करते हुए शुरू करते है।


तो चलिए शुरू करते है:-

― SUN MISSION OF NASA 2018 ―



सूरज से कई अलग-अलग वेवलेंथ में हानिकारक रेडिएशन निकलती है जो कि हमारे सौरमंडल के ग्रहों को गर्म करती है और एनर्जी प्रदान करती है लेकिन भले ही हम सूरज पर 150 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर एक बेहद घने वातावरण के नीचे रहते हैं फिर भी यह किरणें हमारी त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है।

 सूर्य की इन्हीं किरणों के आंकड़े हासिल करने के लिए नासा एक अंतरिक्ष यान को सूरज के बेहद करीब भेज रहा है यह यान सूरज के इतना करीब जाएगा कि जितना और कोई भी यान आज तक नहीं गया, नासा को उम्मीद है कि यह यान पिघलने से पहले हर तरह की जानकारी हासिल कर लेगा, इसके साथ ही दोस्तों अगर आप की ख्वाहिश है की इस मिशन के साथ आपका नाम भी सूरज पर भेजा जाए तो खुश हो जाइए क्योंकि NASA बिल्कुल फ्री में आपका नाम सूरज पर भेज रहा है।

आप इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें क्योंकि जिसको भी अपना नाम सूरज पर भेजना है वह भेज सके क्योंकि इसकी अंतिम तारीख 27 अप्रैल 2018 है, इस तारीख के बाद कोई भी नाम स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोब का नाम एक मशहूर एस्ट्रोनॉमर Dr. Eugene N. Parker के नाम पर रखा गया है इस यान को 2018 की गर्मियों में लॉन्च करने की योजना बनाई जा रही है यह यान सूरज के पास जाने में ज्यादा समय नहीं लेगा और सूरज की सतह से 60 लाख किलोमीटर तक पहुंच जाएगा, कहने को तो यह दूरी बहुत ज्यादा लग रही है लेकिन यह यान सूरज के वातावरण और तापमान को पृथ्वी से 520 गुना अधिक पैमाने पर अनुभव करेगा यानी कि लगभग 1,377 डिग्री सेल्सियस तापमान का सामना करेगा, इसके साथ ही अंतरिक्ष यान हाई रेडियो एक्टिविटी का भी सामना करेगा।

 इस मिशन में यह यान कई बार सूरज के खतरनाक इलाकों में अंदर और बाहर चक्कर लगाएगा और किसी दूसरे अंतरिक्षयान के मुकाबले 7 गुना अधिक नजदीक पहुंच जाएगा, पिछली बार 1976 में एलियास 2 नाम का अंतरिक्ष यान सूरज के पास पहुंचा था तब इस यान की सूर्य से दूरी 430 लाख किलोमीटर थी, पार्कर सोलर प्रोब सूरज की सबसे बाहरी सतह कोरोना तक पहुंचेगा जिसके बारे में हम अभी तक कुछ ज्यादा नहीं जानते।

 उम्मीद जताई जा रही है कि यह यान सूरज की बाहरी परत के रहेश्यो को खोल देगा, 1.5 बिलियन डॉलर की लागत से तैयार इस यान को 31 जुलाई 2018 को फ्लोरिडा में स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंट्रल से लॉन्च किया जाएगा, अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला तो यह यान 7 साल में सूरज की बाहरी परत के पास 24 बार जाएगा, इस यान के बाहर एक 4.5 इंच मोटी कार्बन कंपोजिट शील्ड लगाई गई है जो कि इस यान को सूरज से निकलने वाली हानिकारक किरणों से बचाएगी यानी कि इस यान को 1,377 डिग्री तापमान तक सुरक्षित रखेगी।

 पार्कर सोलर प्रोब का आकार एक कार के बराबर है नासा का कहना है कि यान के अंदर लगे उपकरण इतने हाई टेंपरेचर को सहन कर लेंगे और यान के अंदर सामान्य तापमान पर काम करेंगे, यह उपकरण कई सारी चीजें नापेंगे जिससे कि हमें सूरज के बारे में कई नई जानकारियां मिलेगी, इसके साथ ही इसके चुंबकीय क्षेत्र, इलेक्ट्रिक फील्ड और सोलर विंड को समझने में भी सहायता मिलेगी, वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह सब जानने के बाद हम सूरज के दो महत्वपूर्ण रहस्यों को जान जाएंगे, पहला तो यह है कि सोलर विंड की गति तेज कैसे होती है और दूसरा यह की सूरज की बाहरी परत कोरोना का तापमान उसकी सतह से इतना ज्यादा क्यों होता है।

 नासा के मुताबिक सूरज की सतह का तापमान 5,500 डिग्री सेल्सियस है जबकि उसके वातावरण का तापमान 20 लाख डिग्री सेल्सियस है, यह मिशन हमारे सौरमंडल के इस विशालकाय तारे के बारे में बहुत कुछ बता पाएगा और यह भी संभव है कि इस आग की भट्टी के पास जाकर यह यान सभी तरह के आंकड़े पृथ्वी पर भेज दे, तो हो सकता है कि हमें इन सवालों के एकदम सही जवाब मिल जाए।

 वैज्ञानिक ऐसी आशा कर रहे हैं कि सूरज के इतने पास जाकर यह यान पिघलने से पहले हमें हमारी जरूरत के आंकड़े भेज सके, वैसे मैं यह बता दूं कि कई लोगों का सवाल होगा कि सूरज के पास तो कोई जा ही नहीं सकता इसलिए या तो नासा पागल हो गया है और या फिर हमें झूठी खबर बता रहे हैं तो उन लोगों को बता दु की यह कोई झूठी खबर नहीं है इसे आप नासा की वेबसाइट पर जाकर भी देख सकते हैं।


पहले इस अंतरिक्ष यान का नाम सोलर प्रो प्लस था लेकिन मई 2017 में इसे यूजीन पारकर के नाम पर रख दिया गया, जिन्होंने 1958 में सोलर विंड के होने की बात कही थी, जहां तक की इस यान की गति की बात है तो जब यह यान सूरज के सबसे ज्यादा नजदीक होगा तो इसकी गति 4 लाख 30,000 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी यानी कि यह यान एक सैकेंड में 201 किलोमीटर की दूरी तय करेगा इसकी गति इतनी ज्यादा है कि हम इस गति से धरती से चंद्रमा की दूरी मात्र 30 मिनट से भी कम समय में तय कर सकते हैं, यह यान अब तक का सबसे अधिक गति वाला यान है ऐसा कहा जा रहा है कि इस मिशन में यान के अंदर एक माइक्रोचिप भी जाएगी जिसमें लोगों के नाम मौजूद होंगे, स्टार ट्रेक टीवी सीरीज के एक्टर विलियम शंटर्न ने इसकी पहल की थी और उनका कहना था कि अब लोगों के नाम सूरज के बाहर मौजूद बेहद गर्म वातावरण में दिखाई देंगे इस इस चिप के साथ ही यह यान यूजीन पारकर और उनकी खोज से संबंधित सभी तस्वीरों को भी अपने साथ ले जाएगा।

 इस मिशन के डिप्टी प्रोजेक्ट मैनेजर पैट्रिक हिल का कहना है कि अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों के नाम उन्हें प्राप्त हो चुके हैं दोस्तों अगर आपको सूरज के पास अपना नाम भेजना है तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके अपना नाम भेज सकते हैं यह बिल्कुल फ्री है और इसकी आखिरी तारीख 27 अप्रैल 2018 रखी गई है उसके बाद नाम स्वीकार नहीं किए जाएंगे,
नासा का यह मिशन बहुत ही खतरनाक है जिसमें एक छोटी सी गलती भी सारे अरमानों पर पानी फेर सकती है यानी कि सिर्फ एक गलती और यान सीधा सूरज में समा जाएगा।

सूरज पर अपना नाम भेजने के लिए क्लिक करे और दिये गए निर्देशों का पालन करे


मेने भी अपना नाम सूरज पर भेज दिया है और आप उसका सर्टिफिकेट भी देख सकते है।


तो दोस्तो आज के लिए बस इतना ही।
यहा आने का धन्यवाद।।

रविवार, 11 मार्च 2018

रॉयल एनफील्ड का इतिहास

नमस्कार दोस्तों मै AV  HINDI CREATOR आज आपके लिए लेकर आया हूं  थोड़ा इतिहास से सम्बंधित ब्लोग, आज हम बात करने जा रहे है अधिकतर लोगों की ड्रीम बाइक रॉयल एनफील्ड के बारे में, तो ज्यादा समय नष्ट न करते हुवे शुरू करते है।


तो चलिए करते है शुरू:-





दोस्तों बुलेट को पसंद करने वाले लोग कहते है कि बाइक होतो बुलेट जैसी इसलिए यह बाइक रोड़ से ज्यादा लोगो के दिलो पर राज करती है।
भले ही हमने इस बाइक के ads टीवी पर ज्यादा न देखे हो लेकिन फिर भी सब इस बाइक की ताकत से वाकिफ है।
यहा हम बात कर रहे है ROYAL ENFIELD की जिसके ने सिर्फ भारत मे बल्कि पूूरी दुनिया मे करोड़ों फैंस है और इस ब्रांड की लोकप्रियता का अंदाजा हम इसी बात से लगा सकते हैं कि रॉयल एनफील्ड के कस्टमर इतने ब्रांड लॉयल होते हैं कि इसकी नई बाइक के लिए वह कई महीनों तक इंतजार कर सकते हैं और दोस्तो रॉयल एनफील्ड को एक इंडियन ब्रांड के रूप में जाना जाता है।
आपको यह सुनकर हैरानी होगी कि इसकी शुरुआत 125 साल पहले इंग्लैंड में हुई थी ओर यह आगे चलकर कैसे एक भारतीय ब्रांड बना इस के बारे में हम आगे जानेंगे।


-रॉयल एनफील्ड का इतिहास:-

दोस्तों रॉयल एनफील्ड की शुरुआत अल्बर्ट A.D. और R.W. स्मिथ ने साल 1892 में कि थी और उस समय इस कंपनी का नाम था EADIE MANUFACTURING LIMITED जो की रॉयल स्माल ऑल फैक्ट्री के लिए बंदूक के छोटे छोटे पार्ट्स बनाने का काम करती थी।
फिर आगे चल कर 1896 में eadie manufacturing के अंतर्गत ही एक ओर फेक्ट्री बनाई गई, जिसका नाम रखा गया THE NEW ENFIELD CYCLE COMPANY, यह कंपनी मुख्य रूप से साईकल ओर उसके पार्ट्स बनाती थी।
कुछ सालो बाद कंपनी ने एक नई सोच के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया, 1899 में उन्होंने 4 पहियो वाली एक साईकल बनाई और उसके ठीक 2 साल बाद ही 1901 में साईकल पर ही इंजन जोडकर एनफील्ड ने अपनी पहली मोटरसाइकिल लॉन्च की, जिसमे उन्होंने MINERVA नाम की कंपनी का इंजन उपयोग में लिया था।

ओर फिर 1903 में इस कंपनी ने कार प्रोडक्शन में भी अपना कदम बढ़ा दिया, हालांकि उन्हें इस बिजनेस से अगले कुछ सालों में बहोत ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा, इसलिए उन्होंने अपनी कार बनाने वाली कंपनी को ALLDAYS & ONIONS को बेच दिया।

लेकिन मोटरसाइकिल बनाने में एकाग्रता लाने के बाद उनको सब से बड़ी सफलता 1914 में मिली, जब पहले वर्ल्ड वॉर के समय उन्हें ब्रिटिश वॉर डिपार्टमेंट को मोटरसाइकिल सप्लाई करने का एक बड़ा आर्डर मिला और फिर इंपीरियल रशियन सरकार ने भी उन्ही से मोटरसाइकिल खरीदने का फैसला किया।

यह से इस कंपनी की मोटरसाइकिल बहोत ज्यादा तेजी से प्रसिद्ध होने लगी, और फिर दूसरी वर्ल्ड वॉर के दौरान ब्रिटिश अथॉरिटीस ने इस कंपनी के साथ मिलेक्ट्री मोटरसाइकिल बनाने का एक बहोत बडा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, और फिर दूसरे विश्व युद्ध मे एनफील्ड की मोटरसाइकिल को बड़ी मात्रा में उपयोग में लिया गया।

इंडिया में रॉयल एनफील्ड को 1949 में लाया गयााआ था, हालांकि लोगो ने इसे 1954 से पसन्द करना शुुुुरू किया था जब भारत सरकार ने पुलिस और इंडियन आर्मी के लिए इस बाइक का उपयोग किया था, और उस समय 350cc की 800 मोटरसाइकिल मंगाई गई थी।
1955 में एनफील्ड कंपनी ने मद्रास मोटर्स के साथ पार्टनरशिप की ओर कुछ इस तरह से रॉयल एनफील्ड (इंडिया )की शुरुआत हुई, मद्रास मोटर्स ने पहेली बार 350cc की मोटरसाइकिल बेची जिसके पार्टस वह इंग्लैंड से मंगाते थे।
और फिर 1962 से मोटरसाइकिल के सभी पार्टस इंडिया में ही बनने लगे, हालांकि एनफील्ड(इंग्लैंड) को आगे चल कर जबरदस्त घटा हुवा और इसलिए 1971 में वह कंपनी बन्द करनी पड़ी, लेकिन भारत मे मोटरसाइकिल का प्रोडक्शन चालू रखा गया, लेकिन भारत मे भी इस कंपनी को घटा हो रहा था इसलिए आगे चल कर यह कंपनी EICHER MOTERS LIMITED के साथ जुड़ गई।
और फिर eicher group के मालिक विक्रमलाल के बेटे सिद्धार्थ ने साल 2000 में मार्केटिंग ओर आउटलेट के दम पर फिर से इस मोटरसाइकिल की बिक्री बढ़ा दी, क्योकि उन्होंने समय के साथ डिजाइन में परिवर्तन किया था, ओर एनफील्ड बाइकर्स के लिए अलग-अलग राइड भी ऑर्गेनाइज्ड करती है जिससे लोगो मे भी इस बाइक का क्रेज बढ़ता है।
आज के समय मे यह मोटरसाइकिल भारत मे ही नही बल्कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, इंडोनेशिया जैसे 50 से ज्यादा देशों में बेची जाती है।
2013 में एनफील्ड की कुल 81446 मोटरसाइकिल बिकी ओर 2014 में 51 फीसदी ग्रोथ के साथ 123018 मोटरसाइकिल बेची।
ओर अभी कुछ महीनों पहले 18 सितम्बर 2017 को ही रॉयल एनफील्ड की क्लासिक 350 ओर 500 मॉडल की बाइक लॉन्च की गई।


तो दोस्तो बस आज के लिए इतना ही।।
यह आने के लिए धन्यवाद।।